लखनऊ: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में सोमवार (08 दिसंबर) को वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा हो रही है। इसके लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा की शुरुआत की और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए। ये उसका तुष्टीकरण की राजनीति को साधने का तरीका था। तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में कांग्रेस वंदे मातरम् के बंटवारे के लिए झुकी, इसीलिए कांग्रेस को एक दिन भारत के बंटवारे के लिए भी झुकना पड़ा।
इसके बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई बोले। फिर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ कोई दिखावा नहीं, कोई राजनीति का भी विषय नहीं। इनके भाषण और विचार सुनते हैं तो लगता है कि इन्होंने ही इस गीत को बनवाया है। ये राष्ट्रवादी नहीं, राष्ट्र-विवादी लोग हैं। दरारवादी लोग हैं।
वंदे मातरम् गाने पर होते थे मुकदमे
पीएम मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाने पर अंग्रेज बच्चों पर मुकदमे कर देते थे। मैं कहना चाहूंगा कि आज आजादी के बाद यूपी में क्या हो रहा? बच्चों के स्कूल बंद कर दिए गए। पीडीए के लोगों ने पढ़ाने की कोशिश की, तो उन पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इसलिए ‘वंदे मातरम्’ के भावना को आत्मसात करना होगा।
वहीं, अखिलेश ने कहा कि यूपी ने इन कम्युनल लोगों को वहीं हराकर दिखाया, जहां से ये शुरू हुए थे। इस दौरान अखिलेश अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का हाथ पकड़ा और उन्हें खड़ा किया। फिर बैठा दिया। यह देखकर सपा सांसद ‘PDA जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगे।
पीडीए के लोगों पर मुकदमा दर्ज कर दिया
सपा सुप्रीमो ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों की चर्चा कर बताया कि अंग्रेज बच्चों पर कानून लगा देते थे। आज आजादी में यूपी में क्या हो रहा है। बच्चों के स्कूल बंद कर दिए जाते हैं। पीडीए के लोगों ने पढ़ाने की कोशिश की तो उन पर मुकदमा दर्ज कर दिया। ‘वंदे मातरम्’ के भावना को आत्मसात करना होगा। जिस भावना से गा-गा कर अंग्रेजों को भगा दिया। संविधान से कैसे चले। इस गीत के माध्यम से किसी पर टिप्पणी या थोपने की कोशिश न करें। न ही दबाव बनाने की कोशिश करें।
कैसा देश बनाना चाहते थे, किस दिशा में इसे लेकर जा रहे हैं?
उन्होंने कहा कि केवल यही नहीं ओन करते हैं। भारत माता के चित्र हैं, जिसे बंगाल के महान लोगों ने बनाई थी। अवधेश प्रसाद का हाथ पकड़ के उठाया और फिर बैठा दिया। संसद में पीडीए जिंदाबाद के नारे लगने लगे। ‘वंदे मातरम्’ का भाव ये भी है कि कम्यूनल भाव नहीं चलेगा। अयोध्या की इनकी हार ये दिखाती है। उन्होंने कहा, ‘वंदे मातरम्’ हमारे अंदर बसा है। शब्द भले ही याद न हो, भाव न पता हो, देश की अखंडता चाहते हैं तो शब्द ही पर्याप्त हैं। दूसरा किस्सा सुनाता हूं- सभापति महोदय इनका इतिहास खंगाला दीजिए।
अखिलेश ने कहा कि चुनावी सभा में अम्बेडकर की तस्वीर नहीं लगाते थे। ये तस्वीर कब निकालना शुरू किए। जिस दिन यूपी में जनता ने हरा दिया, तब से ये अम्बेडकर का चित्र लगाने लगे। ‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं है। एकजुटता का नारा था। ये हमें शक्ति देता था। ‘वंदे मातरम्’ के सहारे अंग्रेजों को भगा दिया। जय हिंद व इंकलाब का नारा लगाकर अंग्रेजों को भगाया। कैसा देश बनाना चाहते थे, किस दिशा में इसे लेकर जा रहे हैं।
आजादी के पहले और आजादी के बाद ‘वंदे मातरम्‘ क्यों नहीं गाया?
अखिलेश यादव ने कहा, कभी अंग्रेज विवाद फैला कर बांट कर राज करते थे। कुछ लोग आज भी वही रास्ता अपना रहे हैं। इनका इतिहास खंगाला जाए। आजादी के पहले और आजादी के बाद ‘वंदे मातरम्’ क्यों नहीं गाया। आज जिस भाव से हम बैठे हैं। ‘वंदे मातरम्’ कुछ लोगों ने कब गाया। मुखबिरों से पूछा जाए कि स्वतंत्रता के बाद भी तिरंगा क्यों नही फहराया। ‘वंदे मातरम्’ क्यों नहीं गाया।
उन्होंने कहा, ‘वंदे मातरम्’ कोई दिखावा नहीं है। कोई राजनीति का भी विषय नहीं है। इनके भाषण और विचार सुनते हैं, ऐसा लगता है कि इन्होंने ही इस गाने को बनवाया हैं। जिन्होंने आजादी में भाग ही नहीं लिया, वो ‘वंदे मातरम्’ क्या गाएंगे। अंग्रेजों के लिए मुखबिरी और देशद्रोही करते थे। राष्ट्रवादी नहीं, राष्ट्र विवादी लोग हैं।
दरारवादी लोग देश को तोड़ना चाहते हैं
सपा मुखिया ने कहा, इंडिगों की फ्लाइट उड़ नहीं रही है या उड़ाई नहीं जा रही है। ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ गाने के लिए नहीं है, निभाने के लिए है। देखना चाहिए कि हम कितना निभा रहे हैं। आज के दरारवादी लोग देश को तोड़ना चाहते हैं। ऐसे लोगों ने पहले भी देश के साथ दगा किया। आज भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, सभापति महोदय हमारे सत्ता पक्ष के लोग हर चीज को ओन कर रहे हैं। महापुरुष उनके नहीं है। सत्ता पक्ष के लोग उसे ओन करते हैं। अपनाने की बात आ रही है। सत्ता पक्ष के लोगों के याद दिलाना चाहते हैं। जो भाजपा आज है। जिस समय गठन हो रहा था। मुंबई व महाराष्ट्र के लोग जानते होंगे, आपके अध्यक्ष चुने गए थे। उस समय भाषण देने वाले विषय पर बहस चल रही थी। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। समाजवादी विचारधारा अपनाई। सेकुलर रास्ता अपनाया। मंच पर जयप्रकाश की तस्वीर लगाई। जेपी के रास्ते पर जयप्रकाश चलेंगे। बताएं मंत्री जी कितने सेकुलर हैं। कितने सोशलिस्ट हैं।
अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन ‘वंदे मातरम्‘ के साथ ही चला
पूर्व सीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम्’ जिस तरीके से पूर्व में कांग्रेस के गौरव गोगोई ने बात रखी। उस भावना से जोड़ते हुए कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में इसे गाया गया। अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन ‘वंदे मातरम्’ के साथ ही चला। स्वदेशी आंदोलन में भी ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चले। अंग्रेज इस गाने से घबरा गए। गाने पर देशद्रोही बना दिया जाता था। बच्चों ने गाना गाया। क्लासरूम में गाने पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। इस गीत को बैन कर दिया।
सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, 150 वर्ष के बाद वंदे मातरम् को याद कर रहे हैं। गर्व है कि इस बात का कि इस समय पर बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय को भी याद करें, जिसने लाखों लोगों के बीच उत्साह भरा। आजादी के उस समय अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है। वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है।
वंदे मातरम्
रचयिता: बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय
प्रकाशन: 1882, आनंदमठ उपन्यास में शामिल था।
14 अगस्त 1947: संविधान सभा की पहली बैठक की शुरुआत इस गीत से हुई।
1950: राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।
1896: रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार गाया।
बंकिम चंद्र ने 7 नवंबर को लिखा था, आनंदमठ में छपा था
भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 07 नवंबर, 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। सन् 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।