बरेली में दो फर्मों पर CGST का छापा, 18 घंटे चली जांच में जब्त किए संदिग्ध दस्तावेज
बरेली: दिल्ली से पहुंची केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) टीम ने स्थानीय जीएसटी अधिकारियों के साथ फरीदपुर इलाके की दो औद्योगिक इकाइयों में छापेमारी कर जांच-पड़ताल की। टीम ने एनपी एग्रो और संतोष पॉलीफैब पर अचानक छापा मारा और बुधवार सुबह से देर रात तक दोनों प्रतिष्ठानों की बारीकी से पड़ताल करती रही। इस दौरान उत्पादन का रिकॉर्ड, परिवहन बिल, क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल एंट्री तक सब कुछ खंगाला गया। जांच के दौरान मिलने वाले संदिग्ध दस्तावेजों को टीम ने कब्जे में लिया और संचालकों के बयान दर्ज किए।
जांच की शुरुआत फरीदपुर, रजऊ परसपुर स्थित औद्योगिक परिसर से हुई, जहां अधिकारियों ने स्टॉक, कच्चे माल की एंट्री, तैयार माल की सप्लाई और बिलिंग से जुड़े रजिस्टरों को मिलान किया। वहीं दूसरी टीम सिविल लाइंस स्थित कार्यालय पहुंची, जहां फर्म संचालक के बयान दर्ज किए गए। छापे के दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि जांच में किसी तरह की बाधा न आए। अचानक हुई इस कार्रवाई की खबर पूरे औद्योगिक क्षेत्र में फैल गई, जिसके बाद कारोबारी वर्ग में बेचैनी बढ़ गई और कई उद्यमियों ने एहतियातन अपने दस्तावेज दुरुस्त करने शुरू कर दिए।
संतोष पॉलीफैब में 18 घंटे की हाई-इंटेंसिटी जांच
वहीं, फरीदपुर के नवादावन क्षेत्र स्थित संतोष पॉलीफैब पैकेजिंग यूनिट में टीम देर रात तक डटी रही। लगभग 18 घंटे चली इस कार्रवाई में कर्मचारियों की आवाजाही रोक दी गई और उनके मोबाइल फोन बंद करा दिए गए। कंप्यूटर में दर्ज लेन-देन का मिलान रजिस्टर से किया गया। उत्पादन मात्रा से लेकर बिक्री तक हर आंकड़े की जांच हुई। मैनेजर से भी लंबी पूछताछ चली।
एनपी एग्रो फर्म के संचालक राजू खंडेलवाल ने बताया कि गल्ला ट्रेड में पिछले कुछ वर्षों से मंदी चल रही है। फूड ग्रेन से जुड़े कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ा है। मांग घटी तो टर्नओवर भी कम हुआ और उसी अनुपात में टैक्स भी कम जमा हुआ। उनके अनुसार, टर्नओवर में गिरावट को आधार बनाकर अधिकारियों ने कर चोरी की आशंका जताई, लेकिन 45 साल से फर्म पूरी पारदर्शिता से काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई रूटीन जांच जैसी थी और किसी तरह की कर चोरी नहीं है।
जांच पूरी कर दिल्ली लौटी टीम
गुरुवार भोर तक दस्तावेज कब्जे में लेकर और बयान दर्ज करके टीम दिल्ली लौट गई, लेकिन छापे की चर्चा अभी भी औद्योगिक गलियारों में बनी हुई है।



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