लखनऊ: यूपी के संभल जिले में नवंबर, 2024 में हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी गई है। राज्य सूचना विभाग के मुताबिक, 450 पन्नों की इस रिपोर्ट में हिंसा की घटना और शहर में हुए पिछले दंगों का विस्तृत ब्यौरा है। रिपोर्ट में संभल की जनसंख्या में आए बदलावों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आजादी के वक्त यानी 1947 में जहां संभल में हिंदू समुदाय की आबादी 45% थी, वह अब घटकर मात्र 15% रह गई है। रिपोर्ट बताती है कि आजादी के समय संभल नगर पालिका में 55% मुस्लिम और 45% हिंदू आबादी थी, लेकिन अब मुस्लिम आबादी बढ़कर 85% हो गई है, जबकि हिंदू आबादी 15% पर सिमट गई है। यानी पिछले 78 सालों में यहां हिंदू आबादी 30% घट गई है। इस दौरान संभल में अब तक कुल 15 दंगे हो चुके हैं।
कैसे भड़की थी हिंसा?
24 नवंबर, 2024 को शाही जामा मस्जिद के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए जा रहे सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। कोर्ट के आदेश पर हो रहे इस सर्वे के दौरान स्थानीय लोग मस्जिद के बाहर जमा हो गए थे। जब तनाव बढ़ा, तो पुलिस ने बल प्रयोग किया और गोलीबारी में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। हिंसा के बाद, पुलिस पर छतों से पथराव करने के आरोप में 12 FIR दर्ज की गईं और 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपपत्र के अनुसार, इस मामले में कुल 159 आरोपी थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि घटना स्थल से मिले हथियार यूके, अमेरिका और जर्मनी में बने थे।
इस घटना की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक त्रि-स्तरीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था, जिसके अध्यक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र अरोड़ा थे। इनके अलावा रिटायर्ड IAS अमित मोहन और रिटायर्ड IPS अरविंद कुमार जैन शामिल थे। न्यायिक आयोग ने आज लखनऊ में सीएम योगी से मुलाकात कर गोपनीय जांच रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट को कैबिनेट में पास कराया जाएगा। वहां से विधानसभा पटल में रखी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।