लखनऊ: आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने लखनऊ और गाजीपुर जिले में पर्यटन विकास की आड़ में हुए सात करोड़ रुपये के बड़े घोटाले में लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी का नाम जितेंद्र सिंह है, जो राजकीय निर्माण निगम में उप अभियंता के पद पर तैनात था। ईओडब्ल्यू ने उसे लखनऊ के निशातगंज स्थित ऑफिस से हिरासत में लिया। फिलहाल, उससे पूछताछ की जा रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस घोटाले के कई और चेहरे भी सामने आ सकते हैं।
दरअसल, घोटाला गाजीपुर जिले के पांच पर्यटन स्थलों परमान शाह तालाब, सेवराई का चीरा पोखरा, मां कामाख्या धाम (गहमर), देवकली स्थल और कीनाराम स्थल (देवल) से जुड़ा है। सरकार ने इन जगहों के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों की रकम जारी की थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही निकली। जांच में सामने आया कि जितेंद्र सिंह ने 32 फर्मों को 2.41 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, जबकि इन फर्मों ने ना तो काम पूरा किया और ना ही गुणवत्ता का कोई ध्यान रखा। काम अधूरा छोड़ा गया और जो थोड़ा-बहुत किया गया, वह भी मानकों से बाहर था।
2012-13 से चल रही थी घोटालेबाज़ी
यह घोटाला 2012-13 के दौरान हुआ था और इसकी पहली एफआईआर 2017 में दर्ज की गई थी। तत्कालीन संयुक्त निदेशक पर्यटन (वाराणसी) अविनाश चंद्र मिश्रा ने गहमर थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में कुल 26 लोगों की भूमिका सामने आई थी। अब तक 14 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
EOW की जांच में सामने आया कि इस घोटाले में ठेकेदारों और निगम के अधिकारियों की साठगांठ थी। कागजों पर काम पूरा दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में या तो काम किया ही नहीं गया या बेहद घटिया स्तर का किया गया। सरकारी पैसों का खुलेआम दुरुपयोग हुआ। अब जितेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस घोटाले की और भी परतें खुलेंगी। ईओडब्ल्यू की टीम अब ठेकेदारों और अन्य अधिकारियों को भी पूछताछ के दायरे में लेने की तैयारी कर रही है।