उत्तर प्रदेश

महिला संरक्षण के कानून जागरूकता लाने से महिलाओं को सशक्त आत्मबल देते हैं: यशपाल सिंह  

महिला संरक्षण के कानून जागरूकता लाने से महिलाओं को सशक्त आत्मबल देते हैं: यशपाल सिंह  

गोरखपुर: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर “Rights. Justice. Action. For All Women and Girls.” थीम के अंतर्गत “Legal Awareness and Legal Health” विषय पर एक व्यापक एवं प्रभावशाली कार्यशाला का आयोजन GUWWA हॉल में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर विश्वविद्यालय महिला कल्याण संघ (GUWWA) एवं महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों की छात्राओं, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की संरक्षिका कुलपति Prof. Poonam Tandon रहीं। उन्होंने अपने वक्तव्य में कार्यक्रम के महत्व और खासकर महिलाओं की कानून के बारे मे जानकारी जो उन्हें हर प्रकार की हिंसा से संरक्षण देती हैं उसपर बल दिया। विशाखा गाइडलाइन के तहत बनी कैंपस की आईसीसी कमिटी जो कैंपस की महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षा देती है उसकी भूमिका को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम का संयोजन महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक Prof. Divya Rani Singh द्वारा किया गया, जबकि GUWWA की अध्यक्ष Prof. Nandita Singh कार्यक्रम की संयोजक रहीं। मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता Advocate Yashpal Singh (पूर्व डीजीसी, क्रिमिनल, गोरखपुर) ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों एवं साइबर सुरक्षा विषय पर अत्यंत विस्तृत, व्यावहारिक एवं तथ्यपरक व्याख्यान प्रस्तुत किया।

महिलाओं के संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों पर विस्तार

अपने संबोधन में अधिवक्ता यशपाल सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान महिलाओं को समानता, गरिमा एवं स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005; कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013; दहेज निषेध अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की महिला सुरक्षा से संबंधित धाराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की स्थिति में महिला को तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराने, महिला हेल्पलाइन (1090/181) से संपर्क करने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि संरक्षणात्मक और पुनर्वासात्मक भी है।

महिला संरक्षण के कानून जागरूकता लाने से महिलाओं को सशक्त आत्मबल देते हैं: यशपाल सिंह  

इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा

डिजिटल युग में महिलाओं के सामने बढ़ती चुनौतियों को रेखांकित करते हुए अधिवक्ता सिंह ने साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल, मॉर्फिंग, OTP फ्रॉड, डिजिटल वित्तीय ठगी तथा डेटा चोरी जैसे अपराधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्राओं को निम्न सावधानियाँ अपनाने का सुझाव दिया-

मजबूत एवं गोपनीय पासवर्ड का उपयोग

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखना

अनजान लिंक, कॉल या संदेशों से सावधान रहना

सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में संयम बरतना

किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या निकटतम थाने में शिकायत दर्ज कराना

उन्होंने कहा कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर कानूनी कार्रवाई ही साइबर अपराधों से सुरक्षा का प्रभावी उपाय है।

कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की अनेक प्राध्यापिकाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें Prof. Anubhuti Dubey, Prof. Sunita Murmu, Dr. Anupama Kaushik, Dr. Neeta Singh, Dr. Kalpana, Dr. Tulika Mishra, Dr. Afroza, Dr. Pratima Jaiswal एवं Dr. Vismita Paliwal प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे छात्राओं के समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, साइबर अपराध में साक्ष्य संकलन, शिकायत प्रक्रिया, कानूनी परामर्श एवं आत्मरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता ने सभी प्रश्नों का सरल एवं स्पष्ट भाषा में समाधान प्रस्तुत किया, जिससे छात्राओं में आत्मविश्वास एवं जागरूकता का संचार हुआ। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यशाला महिला सशक्तिकरण, विधिक साक्षरता एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सशक्त, सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *