Asim Arun: उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने कन्नौज में एक कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्था और देरी पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने 26 मार्च को आयोजित इस कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ दिया और जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को पत्र लिखा है। मंत्री ने पत्र में अधिकारियों की लेटलतीफी और अनुशासनहीनता पर गंभीर आपत्ति जताई है। दरअसल, मंत्री असीम अरुण को रोमा स्मारक पर शाम पांच बजकर तीस मिनट पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। वे समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए, लेकिन वहां का नजारा अव्यवस्थित था। पत्र के अनुसार, मुख्य आयोजक और उपजिलाधिकारी वैशाली मंत्री के पहुंचने के पंद्रह मिनट बाद आईं। इसके बाद अपर जिलाधिकारी का आगमन हुआ।
दिनांक 26 मार्च, 2026 का कार्यक्रम pic.twitter.com/s41AXbulcC
— Asim Arun (@asim_arun) March 25, 2026
अनुशासनहीनता पर भड़के मंत्री, कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया
मंत्री को लगभग पैंतालीस मिनट तक कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार करना पड़ा। मंच से बार-बार यह घोषणा की जा रही थी कि कार्यक्रम जिलाधिकारी के आने के बाद ही शुरू होगा। इस स्थिति से क्षुब्ध होकर मंत्री ने कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया। उन्होंने तुरंत जिलाधिकारी को अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए एक कड़ा पत्र लिखा। मंत्री ने अपने पत्र में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। पहला, अधिकारियों की लेटलतीफी। उपजिलाधिकारी वैशाली मंत्री के पहुंचने के पंद्रह मिनट बाद पहुंचीं, जिसके बाद अपर जिलाधिकारी आए। दूसरा, कार्यक्रम शुरू होने में अत्यधिक देरी। मंत्री को पैंतालीस मिनट तक इंतजार करना पड़ा, जबकि मंच से लगातार जिलाधिकारी के आने का इंतजार करने की घोषणा हो रही थी। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। मंत्री ने इस अव्यवस्था को गंभीर अनुशासनहीनता माना है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेने की सलाह
मंत्री असीम अरुण ने अपने पत्र में अनुशासन पर जोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से प्रेरणा लेने की सलाह दी। मंत्री ने कहा कि ये दोनों नेता समय की पाबंदी के लिए जाने जाते हैं और उनकी कार्यशैली अनुकरणीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की नींव अनुशासन पर टिकी है। मंत्री ने कहा, “अनुशासन ही प्रशासन की नींव है। मुझे कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखा। मंत्री के इस कड़े रुख ने जिले के प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है। असीम अरुण का यह पत्र सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहा है।