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काशी और अयोध्या के बाद उत्तर प्रदेश का अगला बड़ा पर्यटन होगा विंध्याचल धाम

काशी और अयोध्या के बाद उत्तर प्रदेश का अगला बड़ा पर्यटन होगा विंध्याचल धाम

लखनऊ: मिर्जापुर का विंध्याचल उत्तर प्रदेश का अगला बड़ा पर्यटन स्थल बनकर उभर रहा है। काशी और अयोध्या की तरह ही मां विंध्यवासिनी मंदिर की लोकप्रियता नए आयाम छू रही है। अनुमान है कि मौजूदा वर्ष मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या 01 करोड़ के पार पहुंच जाएगी। वर्ष 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही 64 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए। अर्थात, हर महीने औसतन 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे। वर्ष 2024 में वर्षांत तक यह आंकड़ा 78 लाख था, जिसे इस बार आसानी से पार कर लिया जाएगा। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

मंत्री ने बताया कि तीर्थयात्रियों की इस बढ़ती आमद से विंध्याचल त्रिकोण यात्रा (विंध्यवासिनी देवी मंदिर, अष्टभुजा मंदिर और काली खोह मंदिर) सहित जनपद के अन्य प्रमुख स्थलों पर भी रौनक बढ़ी है। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजा देवी और मां कालीखोह मंदिरों की परिक्रमा करते हैं। विंध्यवासिनी में रिकॉर्ड भीड़ के चलते पास ही पहाड़ी पर स्थित अष्टभुजा मंदिर में इस साल अब तक 38 लाख से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं, जबकि वर्ष 2024 में पूरे साल यहां कुल 55 लाख दर्शनार्थी आए थे। वहीं, गुफा स्थित कालीखोह मंदिर भी इन दिनों रोजाना हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार है।

विंध्य कॉरिडोर के साथ इको टूरिज्म पर भी काम

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार विंध्याचल को पर्यटन प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सरकार द्वारा विंध्याचल कॉरिडोर के साथ विभिन्न ईको-टूरिज्म परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को दिव्य दर्शन के साथ-साथ मिर्जापुर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक खूबसूरती का अनुभव कराना है।

उन्होंने बताया कि सरकार अष्टभुजा और काली खोह मंदिर क्षेत्र का भी कॉरिडोर शैली में पुनर्विकास कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सड़कों, घाटों और परिवहन सुविधाओं को उन्नत किया जा रहा है। मल्टी-लेवल पार्किंग, शौचालय, भीड़ प्रबंधन क्षेत्र और यात्री सुविधाएं तैयार हो रही हैं। गंगा तट पर नए घाट और पथ का निर्माण भी योजनाबद्ध है, जिससे श्रद्धालु अनेक घाटों को जोड़ते हुए धार्मिक यात्रा कर सकेंगे। शाम की गंगा आरती को और भव्य बनाने के लिए भी विशेष मंच बनाए जा रहे हैं।

अब हर मौसम पहुंच रहे श्रद्धालु-  मुकेश मेश्राम

प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि अब वे दिन नहीं रहे, जब मीरजापुर में मानसून के मौसम में ही झरनों को देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी। मौजूदा समय में वर्षभर श्रद्धालु और पर्यटक विंध्याचल पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें धार्मिक और प्राकृतिक दोनों आकर्षण अपनी ओर खींच रहे हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग मिर्जापुर में पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। विंध्याचल की पहाड़ियों और मीरजापुर के प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन योजना में शामिल किया गया है। झरने, जंगलों और ट्रैकिंग पथों को विकसित कर पर्यटकों को नया अनुभव देने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण होम-स्टे, नेचर वॉक, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन भी पर्यटन का हिस्सा बन रहे हैं। इन प्रयासों से स्थानीय समुदाय को रोजगार और आय का लाभ मिल रहा है। रोमांचक गतिविधियों के शौकीनों के लिए ट्रैकिंग, हाइकिंग और कैंपिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। वहीं, विंध्य क्षेत्र के सलखन फॉसिल पार्क का यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल होना भी क्षेत्र की लोकप्रियता को बढ़ा रहा है।

विंध्याचल का विकास उत्तर प्रदेश की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत धार्मिक, पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक पर्यटन को एकीकृत कर राज्य को देश का प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनाया जा रहा है। पर्यटन की दृष्टि से विंध्य क्षेत्र शानदार है, जहां एक यात्रा अवधि में प्राचीन मंदिरों के दर्शन, झरनों के बीच सैर और स्थानीय होम-स्टे में ग्रामीण जीवन का आनंद उठाने का अवसर मिलता है। वर्ष 2024 में प्रदेश ने 64.9 करोड़ पर्यटकों का स्वागत किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 करोड़ अधिक है। लगातार तीसरे वर्ष उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में देश का नंबर एक राज्य बना हुआ है।

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