वाराणसी: कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को वाराणसी के अपर सत्र न्यायाधीश पंचम ने अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन्हें स्पीड पोस्ट से भेजी गई है। राहुल को 17 मार्च को कोर्ट में पेश होने को कहा गया गया है। यह नोटिस तिलमापुर के पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्रा के द्वारा दर्ज परिवाद की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिया है।
राहुल गांधी ने पिछले वर्ष अमेरिका में भारत में सिख समुदाय की दशा पर भड़काऊ बयान दिया था, जिसका समर्थन खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी किया था। इसी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ एमपी/एमएलए कोर्ट वाराणसी में परिवाद दायर की गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी को नोटिस स्पीड पोस्ट की गई है। कोर्ट ने थाना इंचार्ज सारनाथ को सांसद को इस संबंध में सूचना देने और नियत तिथि पर उपस्थिति होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
तिलमापुर के पूर्व ग्राम प्रधान ने दर्ज कराया है केस
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान सिखों को लेकर भड़काऊ बयान दिए थे। इस पर सारनाथ थानाक्षेत्र के तिलमापुर के पूर्व ग्राम प्रधान नागेश्वर मिश्रा ने एसीजेएम/एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। इस परिवाद को 28 नवंबर 2024 को अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद नागेश्वर ने सत्र अदालत में राज्य सरकार और राहुल गांधी को पक्षकार बनाते हुए निगरानी अर्जी दाखिल की है।
राहुल के बयान से सिखों के बीच असुरक्षा का माहौल
नागेश्वर मिश्रा ने बताया कि पिछले साल अमेरिका दौरे पर गए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि भारत में सिखों के बीच असुरक्षा का माहौल है। उन्हें पगड़ी और कड़ा पहनने का अधिकार नहीं है। न गुरुद्वारों में जाने की अनुमति है। राहुल के इस बयान का खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू ने समर्थन किया। उनके बयान से ऐसा लगता है कि भारत में गृहयुद्ध भड़काने की उनकी साजिश है।
क्या होती है निगरानी याचिका?
निगरानी याचिका किसी ऐसे आदेश के खिलाफ दायर की जाती है, जिसके खिलाफ अपील करने का प्रावधान नहीं है या अपील नहीं की गई है। निचली कोर्ट ने राहुल के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया था। इस याचिका के फैसले की निगरानी के लिए जिला जज की अदालत में निगरानी याचिका डाली गयी थी, जिसे पढ़ने के बाद जिला जज ने स्वीकार कर लिया है।