UP News: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में निषाद पार्टी ने अपने चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज़ करने की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी प्रदेश के चार प्रमुख क्षेत्रों- गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और मेरठ में विशाल जनसभाओं का आयोजन करने जा रही है। इन रैलियों के माध्यम से निषाद पार्टी अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को मजबूती से उठाएगी। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, निषाद पार्टी का आगामी 22 मार्च को गोरखपुर में विशाल रैली का आयोजन प्रस्तावित है। यह रैली पार्टी के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है और इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, समर्थकों एवं निषाद समाज के लोगों की भागीदारी की अपेक्षा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विशाल रैलियों के माध्यम से निषाद पार्टी संदेश देना चाहती है कि वह पूरी तैयारी और मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है। विशेष रूप से पूर्वांचल, जो निषाद पार्टी का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र रहा है, वहां पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। वहीं मेरठ में रैली आयोजित कर पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरण स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत है।
प्रमुखता से उठाया जायेगा आरक्षण का मुद्दा
पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो इन जनसभाओं का मुख्य केंद्र बिंदु मझवार/तुरैहा समाज को अनुसूचित जाति (SC) में परिभाषित किए जाने की मांग होगी। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद इस मुद्दे को रैलियों में प्रमुखता से उठाते हुए इसे जनआंदोलन का रूप देने की रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि यह केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय है। बीते चार वर्षों में सत्ता में रहते हुए भी पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे को लगातार उठाया है और प्रदेश में दो बार “मछुआ एससी संवैधानिक अधिकार यात्रा” का आयोजन किया है। अब इन रैलियों के माध्यम से मझवार आरक्षण के मुद्दे को निर्णायक स्तर तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, खनन-बालू और पुश्तैनी घाटों पर अधिकार बहाली, वर्ग-3 की भूमि को मछुआ समाज के लिए पुनः आरक्षित करना, विमुक्त जाति/जनजाति के अधिकारों की बहाली आदि जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जायेगा। साथ ही, पार्टी वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश की सरकार में भागीदारी के बाद मछुआ/निषाद समाज को मिले वास्तविक लाभों का मुद्दा भी जनता के बीच उठाएगी।
निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखती है निषाद पार्टी!
इसके माध्यम से पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि सरकार में भागीदारी के बाद समाज को क्या ठोस लाभ प्राप्त हुए हैं, विशेष रूप से मत्स्य विभाग में प्रतिनिधित्व मिलने के बाद। प्रस्तावित रैलियों के साथ-साथ निषाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक मजबूती को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने प्रदेश के सभी संगठनात्मक जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। यह निर्णय जमीनी स्तर पर संगठन को अधिक सक्रिय, संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय के साथ-साथ जनसंपर्क और चुनावी तैयारियों को भी नई गति मिलेगी। इन रैलियों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन भी है। निषाद पार्टी इन आयोजनों के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि प्रदेश में उसका मजबूत जनाधार है और वह राजनीतिक समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखती है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और अन्य दलों के साथ संभावित गठबंधन एवं राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रभाव पड़ेगा।