- – अतरौली के एनेक्सी भवन में आयोजित अटल स्मृति सम्मेलन एवं मतदाता पुनरीक्षण अभियान कार्यशाला में बोले मंत्री
UP News: अतरौली के एनेक्सी भवन में आयोजित अटल स्मृति सम्मेलन एवं मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) कार्यशाला को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि अटलजी के विचार, मूल्य और लोकतांत्रिक आचरण आज भी भारतीय राजनीति के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयीजी और बाबूजी स्वर्गीय कल्याण सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के वटवृक्ष को साथ-साथ सींचा। दोनों नेताओं ने उस दौर से संगठन और संघर्ष का कार्य किया, जब पार्टी का जनाधार सीमित था और सिद्धांतों पर टिके रहना सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि अटलजी और कल्याण सिंहजी ने सत्ता को लक्ष्य नहीं, बल्कि सेवा और सिद्धांत को राजनीति का आधार बनाया, जिससे पार्टी एक सशक्त संगठन के रूप में स्थापित हुई।
वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना ही SIR का उद्देश्य
मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती शुद्ध मतदाता सूची से ही संभव है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य किसी भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है, ताकि बाहरी घुसपैठियों द्वारा मतदान जैसी असंवैधानिक स्थिति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी लोकतंत्र को केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नैतिक उत्तरदायित्व और जनविश्वास की व्यवस्था मानते थे। इसी विचारधारा के अनुरूप आज मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि SIR के माध्यम से चुनाव आयोग वास्तविक मतदाताओं की पहचान कर रहा है, लेकिन विपक्ष इस संवैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने और जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
घुसपैठियों द्वारा मतदान किया जाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने यह गलत प्रचार किया कि SIR मतदाताओं के नाम सूची से हटाने या गलत नाम जोड़ने का अभियान है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह प्रक्रिया केवल पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है। संदीप सिंह ने कहा कि हर राजनीतिक दल ने अपने-अपने कार्यकर्ताओं को अंदरूनी तौर पर इस प्रक्रिया में लगाया, लेकिन सार्वजनिक रूप से भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया। बेसिक शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बाहरी घुसपैठियों द्वारा मतदान किया जाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता और यह संविधान के मूल भाव के भी विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि SIR के तहत वर्ष 2003 से पूर्व यहां निवास करने वाले परिवारों के सदस्यों को मताधिकार दिया जा रहा है, जबकि इससे पहले जिनका यहां कोई पारिवारिक आधार नहीं था, वे मतदान के अधिकारी हैं या नहीं, इसका निर्णय विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।