UP News: लखनऊ में व्यापारियों ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात की है। उन्होंने मंत्री को अपना मांग पत्र सौंपा। इसमें कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले कपड़ों पर कभी कोई टैक्स नहीं लगता था। इससे बड़ी संख्या में लोग इस व्यापार से जुड़ रहे थे। यह व्यापार लोगों की रोजी रोटी का साधन बन रहा था। लेकिन, कपड़ों पर जीएसटी लागू होने के पांच वर्षों के अंदर 30 प्रतिशत से अधिक दुकानें बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं।
मांग पत्र में व्यापारियों ने सात प्रमुख मांगें रखीं–
-
सभी कपड़ों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू की जाए।
-
अभी पॉलिस्टर धागे (यार्न) पर 12%, तो कॉटन धागे (यार्न) पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू है।
-
वहीं रेडीमेड कपड़ों पर 12% और कपड़ा क्लॉथ पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू है।
व्यापारियों ने कहा कि देश के बड़े उद्योगपतियों ने कॉकस बना लिया है। जब चाहते हैं एकजुट होकर कपड़ों पर रेट बढ़ा लेते हैं। इस मनमर्जी पर अंकुश लगना चाहिए। छोटे व्यापारियों को भी जीएसटी में सुविधा मिलनी चाहिए। उनका दायरा 40 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया जाना चाहिए। इससे जीएसटी रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़ेगी। ऑनलाइन बाजार ने कपड़े के कारोबार को काफी नुकसान पहुंचाया है। इससे पिछले दो-तीन वर्षों से कारोबार बैठ गया है। जीएसटी की अलग-अलग दरों से भी व्यापार प्रभावित हुआ है। इसके अलावा बाजारों में सर्वे छापों पर रोक लगाई जाए। इस मौके पर अशोक मोतियानी (अध्यक्ष), अनिल बजाज महामंत्री, व्यापारी नेता सुरेश छाबलानी, प्रभु जालान, श्याम कृषनानी, पुनीत लालचंदानी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।