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कांग्रेसियों पर लाठीचार्च के विरोध में सत्याग्रह, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेता रहे शामिल
UP Congress: बीते दिनों लखनऊ में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत आयोजित विधानसभा घेराव कार्यक्रम में कांग्रेसियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह किया और प्रदेश सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना, विधायक वीरन्द्र चौधरी आदि मुख्य रूप से शामिल रहे। यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह प्रदेश के सभी जनपदों में किया गया। अजय राय ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है, किंतु प्रदेश की भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए लगातार दमनकारी नीतियां अपना रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर सरकार ने अपनी तानाशाही प्रवृत्ति का परिचय दिया है, जिसे कांग्रेस का कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं करेगा।
लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है सत्याग्रह: अजय राय
उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। यह सत्याग्रह उसी लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है। यदि सरकार ने अपनी दमनकारी कार्रवाई बंद नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ने को बाध्य होगी। अजय राय ने कहा कि भाजपा सरकार ना सिर्फ किसान मजदूर विरोधी है बल्कि इस देश की मूल लोकतांत्रिक भावना के विरोध में है। अभी सरकार सिर्फ दुर्भावना से ग्रसित होकर मदरसों की जांच करा रही है जो इनकी तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा है। यह दुर्भावना और पूर्वाग्रह से ग्रसित तुरंद बंद होनी चाहिए।
वर्तमान सरकार कांग्रेस से डरी हुई है: प्रमोद तिवारी
वहीं कांग्रेस का वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार के इशारे पर प्रदर्शन के दो दिन पूर्व से ही पुलिस प्रशासन द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन में शामिल न होने देने के लिए कानूनी नोटिस देना, हाउस अरेस्ट करना एवं उन्हें रास्तों में जबरन रोका जाना यह दर्शाता है कि वर्तमान सरकार कांग्रेस से डरी हुई है और तानाशाही रवैया अपनाते हुए अपनी विफलता को छुपाने का कार्य कर रही है। भाजपा सिर्फ मनरेगा योजना में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नाम शामिल होने से योजना को खत्म कर रही है परंतु उनका नाम इस देश से कभी मिटने वाला नहीं है। वहीं दूसरी ओर इस योजना के समाप्त होने से देश के गरीब, मजदूर, किसान, महिला सहित करोड़ों देशवासियों के हाथों से सम्मानजनक रोजगार की गारंटी जरूर समाप्त हो जाएगी।