UP News: आप यूपी प्रभारी व सांसद संजय सिंह के नेतृत्व में अयोध्या से निकली रोजगार दो-सामाजिक न्याय दो पदयात्रा अपने दूसरे दिन अयोध्या के चांदपुर, हरबंशपुर, धबासेमर से प्रारंभ होकर कल्याण भदरसा होते हुए अयोध्या के बीकापुर पहुंची। 13 दिनों तक चलने वाली लगभग 200 किलोमीटर की यह पदयात्रा अयोध्या से शुरू होकर सुल्तानपुर और अमेठी होते हुए प्रयागराज पहुंचेगी। संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश का वह राज्य बन गया है, जहाँ बेरोजगारी चरम पर है। उन्होंने बताया कि देश में सबसे अधिक बेरोजगार अगर किसी प्रदेश में हैं, तो वह उत्तर प्रदेश है। केवल सरकारी नौकरियों की कमी ही नहीं, बल्कि किसान, बुनकर, कुटीर और लघु उद्योग से जुड़े लोग भी आर्थिक संकट और रोजगार के अभाव से जूझ रहे हैं।
जनता के हक़ और सम्मान की लड़ाई है ये पदयात्रा
उन्होंने कहा कि किसान को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिलता, खाद की लाइन में जान जाती है, कर्ज के बोझ से आत्महत्या करनी पड़ती है। आशा बहुएं, आंगनबाड़ी, शिक्षा मित्र, अनुदेशक—सब आज भी नियमितीकरण की प्रतीक्षा में हैं। आप सांसद ने यह भी कहा कि शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले से लेकर टीईटी परीक्षा की बाध्यता तक, शिक्षा क्षेत्र में भी व्यापक असमानता है। छोटे-छोटे उद्योग बंद हो रहे हैं, युवाओं के सामने रोजगार का गहरा संकट है। पदयात्रा के दूसरे प्रमुख मुद्दे पर बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सामाजिक भेदभाव और अन्याय के मामलों में भी देश में शीर्ष पर है। उन्होंने कहा, आज भी दलित समाज के लोगों के साथ मंदिरों, शादियों और सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। आरक्षण में हेराफेरी की घटनाएं आम हैं। पुलिस थाने से लेकर तहसील तक न्याय की सुनवाई के लिए कोई दरवाज़ा खुला नहीं है।
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और असमानता के खिलाफ आम आदमी पार्टी की पदयात्रा के दूसरे दिन भी जबरदस्त जनसमर्थन देखने को मिला। जगह-जगह लोगों ने आप नेताओं का स्वागत किया और पदयात्रा में शामिल होकर अपने समर्थन का इज़हार किया। सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह पदयात्रा एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के हक़ और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब तक हर हाथ को रोजगार और हर नागरिक को बराबरी का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। संजय सिंह ने कहा कि इस पदयात्रा में उठा एक कदम उत्तर प्रदेश के बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए, तो दूसरा कदम दलित, पिछड़े, शोषित और वंचित समाज को उसका जीने का हक दिलाने के लिए उठाया जा रहा है।