बरेली: जिले में 26 सितंबर 2025 को हुए सांप्रदायिक बवाल और दंगों को लेकर पुलिस ने बड़ा किया है। बहेड़ी थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने दंगों के दौरान भीड़ को अवैध असलहे उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने इस गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 5 अवैध पिस्टल (32 बोर), 2 तमंचे और 36 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हथियारों का इस्तेमाल दंगों के दौरान पुलिस बल पर फायरिंग करने के लिए किया गया था। इस पूरी साजिश के तार मौलाना तौकीर रजा को शरण देने वाले फरहत अली और उसके भाई इशरत अली से जुड़े हुए हैं। एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा और सीओ अरुण कुमार के नेतृत्व में बहेड़ी पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर शेरगढ़ बस स्टैंड के पास चेकिंग अभियान चलाया था। इसी दौरान एक संदिग्ध स्विफ्ट कार (UP 25 BP 0824) को रोका गया। कार की तलाशी लेने पर पुलिस की आंखें फटी रह गईं। कार के भीतर से भारी मात्रा में अत्याधुनिक अवैध पिस्टल और कारतूस मिले।
फरहत-इशरत के कहने पर पहुंचाए गए थे अवैध हथियार
पुलिस ने मौके से तसलीम (32) पुत्र जमील अहमद और सोमू खान उर्फ औसाफ (36) पुत्र बबलू खान को गिरफ्तार किया। पकड़े गए दोनों आरोपी बहेड़ी और शेरगढ़ क्षेत्र के रहने वाले हैं और लंबे समय से अवैध हथियारों की तस्करी में लिप्त थे। पूछताछ में पकड़े गए आरोपी सोमू खान ने कुबूल किया है कि वह हिस्ट्रीशीटर इशरत अली और उसके सगे भाई फरहत अली के इशारे पर काम करता था। उसने बताया कि 26 सितंबर, 2025 को दंगे के दौरान उसने फरहत और इशरत के कहने पर ही झुमका तिराहे पर अवैध हथियारों की बड़ी खेप पहुंचाई थी।
थाना बहेड़ी #bareillypolice द्वारा 02 अभियुक्त के कब्जे से 05 पिस्टल 32 बोर मय 36 जिन्दा कारतूस व 02 तंमचा 315 बोर व 12 बोर व दो कारतूस एंव दिनांक 26.09.2025 हुए बरेली दंगों में सहभागिता के संबंध में श्री मुकेश चन्द्र मिश्र, #SPNORTH, बरेली की बाइट। #uppolice https://t.co/yD7DpBA8ab pic.twitter.com/u12q8eAtDs
— Bareilly Police (@bareillypolice) February 19, 2026
सोमू ने खुलासा किया कि इशरत अली ने जिस व्यक्ति को हथियार लेने भेजा था, उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए बाकायदा वीडियो कॉल की गई थी। पुलिस को सोमू के फोन से इस वीडियो कॉल के लॉग्स और कुछ ऐसे वीडियो भी मिले हैं, जिनमें मास्टरमाइंड इशरत अली खुद अवैध पिस्टल से टेस्ट फायर करता हुआ दिखाई दे रहा है।
ये बड़ा खुलासा भी हुआ
पुलिस की जांच में यह साफ हुआ है कि जब बरेली दंगों की आग में जल रहा था, तब मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा फरहत अली के घर ‘5 एन्क्लेव’ में बैठकर पूरी घटना की निगरानी कर रहा था। फरहत अली वही व्यक्ति है जिसे दंगे की विवेचना के दौरान तौकीर रजा को पनाह देने के आरोप में पहले ही जेल भेजा जा चुका है। अब उसके भाई इशरत अली का नाम सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह केवल अचानक भड़का दंगा नहीं था, बल्कि पुलिस पर हमला करने के लिए हथियारों का पहले से इंतजाम किया गया था। पुलिस अब उस व्यक्ति की तलाश कर रही है, जिसने झुमका तिराहे पर सोमू से हथियारों की डिलीवरी ली थी।
एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा ने कहा, बहेड़ी पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर बरेली दंगों की एक बड़ी साजिश का खुलासा किया है। इनके पास से बरामद अवैध पिस्टल और कारतूसों का सीधा संबंध 26 सितंबर को हुई हिंसा से है। पूछताछ में यह पुख्ता हुआ है कि फरार आरोपी इशरत अली और जेल में बंद फरहत अली ने दंगाइयों को हथियार मुहैया कराए थे ताकि पुलिस बल को निशाना बनाया जा सके। आरोपियों के मोबाइल से मिले वीडियो और डिजिटल साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं। एसआईटी और पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं, जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।