चमोली: पिछले साल के मुकाबले उत्तराखंड के चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट इस बार 11 दिन पहले खुलेंगे। तय हुआ है कि बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं, उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विधि-विधान से भक्तों के लिए खोले जाएंगे।
बसंत पंचमी के मौके पर आज नरेंद्र नगर राजमहल में विधि-विधान के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की आधिकारिक घोषणा की गई। परंपरा के अनुसार राजपुरोहित महाराजा मनुजेंद्र शाह की जन्मपत्री और लग्न पत्रिका देखकर शुभ मुहूर्त निकालते हैं।
2025 में कब बंद हुए थे बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट
2025 में उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को विधि-विधान के साथ बंद किए गए। इसके अगले दिन ही दिन 23 अक्टूबर को यमुनोत्री धाम के कपाट विधि विधान से बंद कर दिए गए थे इसके बाद यात्रियों के लिए इन दोनों धामों में नियमित दर्शन बंद हो गए और शीतकालीन पूजा की व्यवस्थाएं शुरू कर दी गईं।
वहीं, चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। फिलहाल बद्रीनाथ की शीतकालीन पूजा जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में चल रही है।
गाडू घड़ा यात्रा से जुड़ी है कपाट खुलने की परंपरा
पौराणिक परंपरा के अनुसार, गाडू घड़ा यात्रा राजमहल पहुंचती है। यहां कुंवारी और सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर बद्रीनाथ धाम के लिए तिल का तेल निकालती हैं। तेल की पवित्रता बनाए रखने के लिए महिलाएं मुंह पर पीला कपड़ा बांधकर यह धार्मिक कार्य करती हैं। इसी तेल से धाम में भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना होती है।
बद्रीनाथ धाम में अप्रैल 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
बद्रीनाथ धाम में पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत मास्टर प्लान पूरा होने के बाद धाम साफ और परिसर बड़ा दिख रहा है। ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्देश्य अगले 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बद्रीनाथ को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। करीब 424 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अगली चारधाम यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें। यह मास्टर प्लान 85 एकड़ क्षेत्र में तीन चरणों में लागू किया जा रहा है।
फेज-1 में शेषनेत्र और बद्रीश झील का सौंदर्याकरण, अलकनंदा रिवर फ्रंट और वन-वे लूप रोड का काम अंतिम चरण में है। फेज-2 में मंदिर परिसर का विस्तार और अस्पताल का निर्माण शामिल है।