Lucknow News: आम आदमी पार्टी के नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईआर को देश का सबसे बड़ा चुनावी घोटाला बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और कई राज्यों में एसआईआर के नाम पर 17 बीएलओ की जान जा चुकी है, 563 लोगों को नोटिस भेजे गए, 181 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नौकरी खत्म कर दी गई और हजारों परिवार भय और उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब चुनाव डेढ़ साल बाद होने हैं तो सरकार को एक ही महीने में पूरा एसआईआर क्यों चाहिए? क्या यह चुनाव सुधार है या विपक्ष और वंचित समाज को वोटर लिस्ट से साफ करने की सुनियोजित साजिश? संजय सिंह ने कहा कि बेरोजगारी, पेपर लीक, सामाजिक न्याय पर सरकार जानबूझकर चुप है और नकली मुद्दों के जरिए जनता को भ्रमित करना चाहती है।
पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए आप सांसद ने कि “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” अभियान का अभी समापन नहीं बल्कि आरम्भ हुआ है। अब यह पदयात्रा पूरे उत्तर प्रदेश में आठ चरणों में चलेगी। पहला चरण 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा जिलों में निकाला जाएगा। उन्होंने जनता से अपील की कि जो लोग पिछली यात्रा में शामिल नहीं हो पाए, वे इस यात्रा से जुड़ें और मिस्ड कॉल नंबर 7500040004 पर कॉल कर अपना पंजीकरण कराएं। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार की तानाशाही और एसआईआर जैसे चुनावी घोटालों के खिलाफ लड़ाई लगातार जारी रहेगी और संसद के शीतकालीन सत्र में आम आदमी पार्टी इसे पूरी ताकत से उठाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो
एसआईआर प्रकरण पर हमला बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक लाखों वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। बिहार में 80 लाख नाम हटाए गए, एक ही विधानसभा में 50–60 हजार वोट काटे जा रहे हैं। यहां तक कि रिटायर्ड आईएएस विद्यासागर और उनकी पत्नी का नाम भी काट दिया गया—क्या इसका मतलब है कि वे भी ‘घुसपैठिए’ हैं? उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा सरकार के एजेंडा को पूरा करने में इतनी तेजी दिखा रहे हैं कि सरकारी कर्मचारी आत्महत्या तक करने लगे हैं। यह प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक निर्देश है—और इसके लिए चुनाव आयोग सीधा जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि 17 बीएलओ की मौत पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।