बरेली: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में सालों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर टीईटी (TET) की अनिवार्यता थोपने के विरोध में यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर की मौजूदगी और जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों ने शहर में मशाल जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया। शील चौराहा, राजेंद्र नगर से शुरू हुआ जुलूस शहीद स्मारक सलेक्शन पॉइंट टावर तक पहुंचा, जहां शिक्षकों ने एकजुट होकर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठाई।
मशाल जुलूस को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। वर्षों की सेवा और समर्पण से ही शिक्षक की योग्यता सिद्ध होती है, लेकिन सरकार पात्रता परीक्षा के नाम पर अनुभवी शिक्षकों के स्वाभिमान और उनके लंबे सेवाकाल का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम तय थे, सेवा के बीच में उन्हें बदलना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मानसिक प्रताड़ना बंद करे विभाग
यूटा के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि बरेली का शिक्षक समाज टेट की अनिवार्यता का विरोध करता है। जिन शिक्षकों ने 10 से 15 वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, उन्हें अब परीक्षा की कसौटी पर कसना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि विभाग को शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के बजाय उनकी पदोन्नति और सेवा निरंतरता पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही मांग की कि पुराने शिक्षकों को टेट से तत्काल मुक्त किया जाए।
इन संगठनों का मिला समर्थन, ये रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, महिला शिक्षक संघ, विशिष्ट बी.टी.सी. एसोसिएशन, अटेवा और एससी-एसटी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।