बरेली: योगी सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग को मजबूती देने के लिए अहम निर्णय लिया है। सरकार की ओर से तेल मिल (ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट) की स्थापना पर सब्सिडी देने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी समितियां आवेदन कर सकती हैं। इच्छुक किसान और सहकारी संगठन नौ जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं।
उप कृषि निदेशक हिमांशु पांडे ने बताया कि योजना के तहत 10 टन क्षमता की ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट लगाने पर सरकार अनुदान उपलब्ध कराएगी। इससे सरसों, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी जैसी तिलहनी फसलों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण संभव हो सकेगा। किसान केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तेल उत्पादन कर अतिरिक्त मुनाफा भी कमा सकेंगे।
एफपीओ और सहकारी समितियों के लिए सुनहरा मौका
सरकार का फोकस व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संगठित किसान समूहों पर है। इसी वजह से योजना में एफपीओ और सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी गई है। अनुदान से पूंजीगत लागत कम होगी और ग्रामीण इलाकों में स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी उद्योग से जोड़ने में मदद मिलेगी।
इस योजना से किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। एक ओर तिलहनी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य तेल उपलब्ध हो सकेगा। परिवहन और बिचौलियों की लागत घटने से उपभोक्ताओं को भी अपेक्षाकृत सस्ता तेल मिल पायेगा। सरकार का मानना है कि यह योजना खेती को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक ठोस पहल साबित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी।