लेह: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार (22 मार्च) को छह महीने (लगभग 170 दिन) बाद लेह पहुंचे। केंद्र ने 14 मार्च को वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। इसके बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा किया गया था।
लेह में उनके लिए स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें वांगचुक के सैकड़ों समर्थक पहुंचे। वांगचुक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस मकसद के लिए हम काम कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज उगेगा। हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
लेह: कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लेह स्थित एनडीएस ग्राउंड पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से लोग उन्हें बधाई देने के लिए एकत्रित हुए। pic.twitter.com/JYtoA85Ddz
— IANS Hindi (@IANSKhabar) March 22, 2026
जिन्होंने मेरा साथ दिया, सभी का शुक्रिया
वांगचुक ने कहा कि 170 दिनों के बाद इन पहाड़ों में आकर और लोगों से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। हमें उम्मीद है कि सभी तरफ से ऐसा ही माहौल बनेगा और मैं पूरे देश के उन लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, जिन्होंने इस संघर्ष में हमारा साथ दिया। मैं लोगों से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।
हमारे मकसद के लिए जरूर उगेगा नया सूरज
समर्थकों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने भावुक अंदाज में कहा कि उनका संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे लद्दाख के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा, जिस मकसद के लिए हम काम कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज जरूर उगेगा। हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं और हमें विश्वास है कि हमारी आवाज सुनी जाएगी।
#WATCH | लेह: लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, "मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। लगभग 180 दिनों के बाद मैं इन पहाड़ों में आया हूं और लोगों से मुलाकात की है। जिस मकसद के लिए हम काम कर रहे हैं, हमें उम्मीद है कि एक नया सूरज निकलेगा। उम्मीदों के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं…… pic.twitter.com/tFgqXVVyVY
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 22, 2026
हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था
वांगचुक ने जेल के समय को कठिन अनुभव बताते हुए कहा कि हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था। वहीं, इस दौरान मेरी पत्नी गीतांजली को कानूनी लड़ाई में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
दरअसल, केंद्र ने 14 मार्च को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। पिछले साल लद्दाख में उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई थी। दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे।
NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।