रायबरेली: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द की ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ अब रायबरेली से निकल चुकी है। उनका अगला पड़ाव उन्नाव होगा। उन्होंने एक दिन पहले बनारस में धर्मयुद्ध की घोषणा की थी, जो कि लखनऊ में आकर रुकेगी। शंकराचार्य शनिवार को रायबरेली पहुंचे, जहां भाजपा समर्थित विधायक मनोज पांडेय के भतीजे यश पांडे के आवास पर रात में रुके। रविवार सुबह 10 बजे उन्होंने उन्नाव के लिए प्रस्थान किया।
इससे पहले शनिवार को शंकराचार्य ने मीडिया से बात की। वहीं, सूर्यास्त के बाद शंकराचार्य ने मौन धारण कर लिया था और मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया था। मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने बताया कि धर्म युद्ध की शुरुआत बनारस से शंखनाद के साथ हुई और यह लखनऊ तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार से गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग 40 दिनों के भीतर की गई थी।
लखनऊ में उठाया जाएगा अगला कदम
शंकराचार्य ने कहा कि 38 दिन बीत चुके हैं और अब केवल दो दिन बचे हैं, जिसके बाद लखनऊ में अगला कदम उठाया जाएगा। शंकराचार्य ने बताया कि सनातन धर्म में कुछ ऐसे लोग आ गए हैं जिनका धर्म के नाम पर सिर्फ छलावा करना है मेरा उद्देश्य उनको सनातन धर्म से विरक्त करना है।
उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता ने गौ माता की रक्षा के लिए कई सरकारों को वोट दिया था। वर्तमान सरकार ने भी सनातन धर्म के नाम पर गौ रक्षा कानून लाने का वादा किया था, लेकिन नौ साल बीत जाने के बावजूद यह कानून लागू नहीं हुआ। यह साबित करता है कि सनातन धर्म के नाम पर केवल छलावा किया जा रहा है।
शंकराचार्य ने कहा– गौ रक्षा कानून की मांग दबाई जा रही है
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि गौ रक्षा कानून की मांग सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म के अनुयायियों की मांग है। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक द्वारा बटुको के सम्मान के बाद की गई टिप्पणियों पर उन्होंने भविष्य में कार्रवाई की मांग की थी, न कि तत्काल कार्रवाई हुई।
उन्होंने कहा कि सच्चे सनातनी होने का प्रमाण एक दिन में दिया जा सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया को 40 दिन का समय देकर सनातनी होने का साक्ष्य देने को कहा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। शंकराचार्य ने कहा कि अगर आप सच्चे सनातनी हैं तो प्रमाण देकर वापस आएं।
शंकराचार्य उन्नाव के लिए निकले
रायबरेली में शंकराचार्य का दौरा समाप्त होने के बाद जब वे उन्नाव के लिए रवाना हुए, तो मोड़ पर इलेक्ट्रिक वायर लटकने के कारण उनकी गाड़ी करीब दो मिनट तक खड़ी रही। सुरक्षा गार्ड्स ने लकड़ी की मदद से तार को ऊपर उठाया और इसके बाद गाड़ी आगे बढ़ी, जिसमें स्वयं शंकराचार्य विराजमान थे।