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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे संजय सिंह, यूपी सरकार के आदेश को दी चुनौती
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में स्कूलों में विलय करने के फैसले के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संजय सिंह की ओर से अधिवक्ता श्रीराम परक्कट और फारुख खान द्वारा दाखिल की गई याचिका में यूपी सरकार के आदेश और उस सूची को चुनौती दी गई है, जिसमें कम नामांकन वाले स्कूलों की पहचान कर उन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया है। सांसद संजय सिंह ने इस निर्णय को ‘मनमाना, असंवैधानिक और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के खिलाफ़’ करार देते हुए कहा कि यह फैसला न केवल संविधान के अनुच्छेद 21A का उल्लंघन है, बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की मूल भावना के भी विपरीत है।
याचिका में क्या है? संजय सिंह ने बताया
आप सांसद ने बताया कि सरकार ने स्कूल प्रबंधन समितियों से कोई परामर्श नहीं लिया और न ही इस फैसले के लिए विधानसभा की कोई मंज़ूरी ली गई है। इतना ही नहीं, यह आदेश शैक्षणिक सत्र के मध्य में चुपचाप लागू कर दिया गया, जिससे हजारों छात्रों और अभिभावकों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। सांसद संजय सिंह ने याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह फैसला विशेष रूप से समाज के गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को प्रभावित करेगा। लड़कियां, विकलांग बच्चे और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले परिवार इस आदेश से सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे। कई अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें दूर के स्कूलों में भेजने से मना कर दिया है। जहां स्कूल अब नदियों, जंगली इलाकों या व्यस्त हाईवे के पार स्थित हैं।
विफलता को छिपाने की कोशिश कर रही है योगी सरकार
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों के गिरते बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी के कारण खुद ही छात्रों की संख्या घटा रही है और अब उसी आधार पर स्कूलों को बंद करने का कुतर्क दे रही है। उन्होंने कहा, योगी सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा बच्चों और गरीब परिवारों पर फोड़ रही है। लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। आम आदमी पार्टी इन बच्चों के भविष्य की लड़ाई सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेगी।