RBI Repo Rate: रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया है. 4 फरवरी से शुरू हुई मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee Meeting) की बैठक खत्म हुई, जिसमें लिए फैसलों की जानकारी दी गई. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला लेते हुए रेपो रेट को 5.25 परसेंट पर बरकरार रखा. MPC मीटिंग के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा, ”मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 परसेंट पर अपरिवर्तित और इस पर न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला किया है.”
आने वाले साल में आर्थिक गतिविधि अच्छी रहने की उम्मीद
उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच आने वाले साल में आर्थिक गतिविधि अच्छी रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू महंगाई और ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव है. उनके मुताबिक, अगले दो दिनों में भारत को GDP और महंगाई दोनों के लिए एक नया बेस ईयर मिलने वाला है और मॉनिटरी पॉलिसी भी नई सीरीज पर बेस्ड महंगाई की डेटा से गाइड होगी. रिजर्व बैंक ने FY2025-26 के लिए अपने ग्रोथ आउटलुक को 7.3 परसेंट से बढ़ाकर 7.4 परसेंट कर दिया है. वहीं, कारोबारी साल 2027 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाईके अनुमान को क्रमश: 4 परसेंट और 4.2 परसेंट कर दिया है.
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह रेट है, जिस पर देश का केंद्रीय बैंक (भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) लिक्विडिटी की कमी को पूरा करने के लिए कमर्शियल बैंकों को लोन देता है. बैंक सरकारी प्रतिभूतियों (Securitues) के बदले रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं और बाद में एक निर्धारित दर पर उसे चुका भी देते हैं. रेपो रेट बढ़ने पर बैंकों के लिए RBI से उधार लेना महंगा हो जाता है, जिससे बैंक होम लोन या कार लोन पर इंटरेस्ट बढ़ा देते हैं. रेपो रेटकम होने पर बैंकों के लिए कम ब्याज दर पर ग्राहकों को लोन देना आसान हो जाता है. कुल मिलाकर रेपो रेट के घटने-बढ़ने का आपकी जेब पर असर पड़ता है.
रेपो रेट का असर
रेपो रेट कम होने का फायदा सीधे देश की जनता को मिलता है. जाहिर सी बात है कि कार या होम लोन सस्ता होगा, किस्त घटेगी, तो लोगों की परचेजिंग पावर बढ़ेगी. मार्केट में डिमांड बढ़ेगी, जिससे कैपिटल फ्लो भी बढ़ेगा. वहीं, रेपो रेट कम होने से कंपनियों के लिए पूंजी की लागत भी कम होती है, जिससे उनके कैश फ्लो में भी सुधार देखने को मिलता है.