नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.5% पर जस का तस रखा है यानी लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी ईएमआई भी नहीं बढ़ेगी। आरबीआई ने जून में ब्याज दर 0.50% घटाकर 5.5% की थीं। यह फैसला मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की 4 से 6 अगस्त तक चली मीटिंग में लिया गया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज यानी 6 अगस्त को इसकी जानकारी दी।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कमेटी के सभी मेंबर्स ब्याज दरों में स्थिर रखने के पक्ष में थे। टैरिफ अनिश्चितता के कारण ये फैसला लिया गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। इसमें बदलाव नहीं होने का मतलब है कि ब्याज दरें न तो बढ़ेंगी और न घटेंगी।
ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं: गवर्नर
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, मानसून सीजन अच्छा चल रहा है। साथ ही, त्योहारों का सीजन भी नजदीक आ रहा है, जो आमतौर पर आर्थिक गतिविधियों में उत्साह और तेजी लाता है। ये अनुकूल माहौल, सरकार और रिजर्व बैंक की सहायक नीतियों के साथ, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य में अच्छा संकेत देता है। भले ही ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।
इस साल 3 बार घटा रेपो रेट, 1% की कटौती हुई
आरबीआई ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1% घटाई।