लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर विरोध शुरू हो गया है। लखनऊ में फिल्म के डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। शिकायत सीएम के निर्देश पर खुद हजरतगंज कोतवाली में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने कराई है। पुलिस का कहना है कि फिल्म का नाम और इसकी कहानी एक खास जाति और समुदाय, खासकर ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दिखाती है। इससे लोगों में नाराजगी फैल सकती है। कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे ब्राह्मणों का अपमान बताया। केंद्र सरकार से फिल्म को बैन करने की मांग की। वहीं, यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा है कि घूसखोर ब्राह्मण नहीं, भाजपा सरकार है। योगी सरकार में 700 से अधिक ब्राह्मणों की हत्या हो चुकी। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है।
संतों ने भी जताई कड़ी आपत्ति
प्रयागराज के संतों ने भी फिल्म को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। शृंवेरपुर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य जी महाराज ने कहा कि बॉलीवुड का रवैया दोहरा है। एक खास वर्ग को बार-बार टारगेट कर ऐसी फिल्में बनाई जाती हैं, जिससे समाज को बांटने का काम होता है। वहीं, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ जैसी फिल्में सनातन परंपरा और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने फिल्म को तत्काल बैन करने की मांग की है।
इस बीच फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडेय ने ऑफिशियल बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि फिल्म के टाइटल से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है। हम उन भावनाओं को समझते हैं। इसलिए हमने फिलहाल सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला किया है।
मंत्री बोले– हिम्मत हो तो इस्लाम के खिलाफ फिल्म बनाकर दिखाओ
यूपी के मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि किसी भी समाज विशेष के खिलाफ इस तरह नकारात्मक बात नहीं होनी चाहिए। ब्राह्मण समाज की हमेशा विद्वानों में गिनती होती रही है। सनातनी बहुत कोमल होते हैं। इस्लाम के खिलाफ फिल्म नहीं बनाते हैं। अगर हिम्मत है तो बनाकर दिखाओ। घूसखोर पंडत फिल्म गलत बनाई गई है।