लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अप्रैल से जुलाई के बीच होने वाले पंचायत चुनाव टल सकते हैं। चुनाव से पहले राज्य में एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC कमीशन) बनाया जाएगा। योगी सरकार ने लखनऊ हाईकोर्ट को इस बाबत हलफनामा दिया है।
दरअसल, हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में लगेगा समय
सरकार ने बताया कि समर्पित पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में सीटों का आरक्षण तय होगा। आयोग को आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में करीब 2 महीने का समय लग सकता है। ऐसे में पंचायत चुनावों का टलना तय है।
क्यों मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों पर सवाल उठे?
प्रदेश में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल अक्टूबर, 2025 में खत्म हो गया था। लेकिन सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया। याचिकाकर्ता के वकील मोती लाल यादव ने बताया कि कानूनी रूप से पिछड़ा आयोग के पास सर्वे कराने का अधिकार नहीं है। अगर आयोग का तीन साल का मूल कार्यकाल खत्म नहीं हुआ होता, तो वह आरक्षण का सर्वे कर सकता था। अब नया समर्पित आयोग पिछड़ों का ‘रैपिड सर्वे’ करेगा। इस सर्वे के जरिए ही पिछड़ों की वास्तविक आबादी का पता लगाया जाएगा और उसी के अनुसार सीटों का आरक्षण लागू होगा।
उत्तर प्रदेश-
पंचायत चुनाव का मामला –
सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया – पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा , उसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण लागू होगा, तत्पश्चात पंचायत चुनाव होंगे ⁉️ pic.twitter.com/0ARleRNOKu
— Mr Rammurat gupta ☎️ (@Ramji6077865456) February 12, 2026
अब रिपोर्ट मिलने के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव
पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है। किसी भी स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव से पहले तीन साल के कार्यकाल वाला पिछड़ा वर्ग आयोग या समर्पित कमीशन होना जरूरी है। इसी क्रम में सरकारी वकील ने लखनऊ हाईकोर्ट में बताया कि उत्तर प्रदेश में अब एक समर्पित आयोग का गठन किया जा रहा है, जो पूरे प्रदेश में गहन सर्वे करेगा। इसका उद्देश्य पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाना है।
सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया है कि पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान समर्पित आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आयोग की रिपोर्ट से पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी और चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।