लखनऊ: संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में राजधानी के अटल बिहारी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में सोमवार को पिछड़ा वर्ग सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद चंद्रशेखर आजाद ने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कहा कि आपके व्यवहार से आपके व्यक्तित्व का आकलन होता है। महापुरुषों को पूजने की नहीं पढ़ने की जरूरत है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा, बहुजन समाज ने भी महापुरुषों को पूजना शुरू कर दिया है। उन्हें पढ़कर मुक्ति का रास्ता मिल सकता है। ज्योतिबा फुले का कार्यक्रम दो दिन पहले करना था, लेकिन हॉल खाली नहीं था, इसलिए दो दिन बाद किया। जो लोग मुझसे प्यार करते हैं और वे इन लोगों को जरूर पढ़ें, वरना आंदोलन से नहीं जुड़ पाओगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की फेहरिस्त में वीपी सिंह का नाम भी शामिल करता हूं।
आज नेता पैसे देकर बुलाते हैं, फिर भी हॉल नहीं भर पाते
सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 25 जनवरी को चर्चा हुई कि आजाद समाज पार्टी युवाओं और क्षेत्र की पार्टी है। जवाब देने के लिए तय हुआ कि 18 मंडलों में प्रबुद्ध जन सम्मेलन करेंगे। पहला कार्यक्रम सहारनपुर और आखिरी प्रयागराज में हुआ। इससे दूसरे दलों की नींद खुल गई। सभी ने कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं और इनमें बुजुर्गों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। आज नेता और पार्टी का सम्मान नहीं बचा है। नेता पैसे देकर बुलाते हैं, लेकिन फिर भी हॉल नहीं भर पाता है।
आजाद ने कहा, हमने लखनऊ में मुस्लिम समाज की समस्याओं को लेकर कार्यक्रम किया। दूसरों को मुसलमान का नाम लेने पर करेंट लगता है। समस्या का समाधान कर दिया तो बहुतों की राजनीति खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी बहुजन समाज के दूसरे दलों के लोगों का कार्यक्रम था, इसलिए मैंने अपना कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया। लोगों ने कहा कि मैं डर गया। मैं किसी से डरता नहीं हूं। आप लोग वर्ण व्यवस्था के बारे में पढ़िए। जातियां इंसानों में नहीं हो सकती। केवल नाम से जाति की पहचान आप नहीं कर सकते।
सरकार में आने पर OBC की सभी मांगें करेंगे पूरी
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पुराने संविधान में शूद्र का स्थान अंतिम था। शूद्र अपवित्र है, शूद्र को पढ़ना पाप है, शूद्र को धन अर्जन का अधिकार नहीं, शूद्र का कर्तव्य ऊंची जाति की सेवा करना है, शूद्र जन्म से दास है, जिनकी कुर्सियां बैठने के बाद धो दी जाती हैं। वे भी कहते हैं कि मैं ओबीसी हूं। शूद्र को पढ़ने का अधिकार नहीं था, इसीलिए दबे-कुचले रहे क्योंकि महापुरुषों ने कहा कि शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़ेगा। शिक्षित होने के बाद ये समझ आयेगा। आजाद समाज पार्टी में कभी भी परिवारवाद नहीं आएगा, जो केवल काम करेगा वो ही पार्टी में तरक्की पाएगा। हम ओबीसी की सारी मांगों को सरकार में आने पर पूरा करेंगे।