नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर केंद्र सरकार ने शनिवार (29 नवंबर) को नया आदेश जारी किया है। अब व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स मोबाइल में एक्टिव सिम कार्ड के बिना नहीं चल पाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे साइबर धोखेबाजों का पता लगाने में मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग के आदेश में कहा गया है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स यह तय करें कि एप तभी चलेगा, जब यूजर की रजिस्टर्ड सिम उस मोबाइल में एक्टिव होगी।
इतना ही नहीं ‘सिम बाइंडिंग’ के तहत अगर मोबाइल से सिम निकाल ली जाती है तो वॉट्सएप और बाकी दूसरे मैसेजिंग एप बंद हो जाएंगे। वेब ब्राउजर यानी लैपटॉप या डेस्कटॉप के जरिए लॉगिन करने वाले यूजर के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हर छह घंटे में यूजर को लॉगआउट करना होगा। इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगिन हो सकेगा।
नए बदलाव के बाद क्या फर्क पड़ेगा?
अब इन एप्स में लॉगिन नंबर एक्टिवेट होने पर ही प्रयोग किया जा सकेगा। यानी SIM बंद तो एप भी बंद। नंबर दोबारा जारी होने पर पुराना यूजर एप नहीं चला सकेगा। यूजर को एप चलाने के लिए अपना नंबर चालू रखना जरूरी होगा। इसे SIM-बाइंडिंग नियम भी कह रहे हैं।
SIM-बाइंडिंग नियम क्या है?
इसका मतलब है कि कोई भी मैसेजिंग एप (जैसे WhatsApp, Telegram आदि) तभी चलेगा जब फोन में आपकी सक्रिय SIM लगी हो। अब एप्स को मोबाइल नंबर से लगातार लिंक रहना होगा। अगर SIM हट गई या बंद हो गई, तो ऐप काम नहीं करेगा।
नियम में बदलाव का कारण
अभी जारी फीचर टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी के लिए चुनौती बन रहा है, क्योंकि देश के बाहर से साइबर-फ्रॉड करने के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। लगातार सिम-बाइंडिंग से स्पैम, फर्जी कॉल और वित्तीय ठगी पर लगाम लगने की उम्मीद है।
नए नियम के बाद वेब लॉगिन में क्या बदलाव होगा?
नए नियम के बाद लैपटॉप-डेस्कटॉप पर मैसेजिंग एप लगातार लॉगिन नहीं रह सकेंगे। यूजर को हर छह घंटे में दोबारा QR कोड से लॉगिन करना होगा। एप तभी चलेगा जब फोन में सक्रिय SIM लगी होगी। अगर SIM बंद हो गई या हटा दी गई, तो कंप्यूटर और मोबाइल दोनों पर एप तुरंत बंद हो जाएगा।
इस नियम को कब तक लागू किया जाएगा?
कंपनियों को नियम लागू करने के लिए 90 दिन की समय दिया गया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सभी ओवर-द-टॉप (ओटीटी) संचार प्लेटफॉर्म को 90 दिन में सिम-टू-डिवाइस बाइंडिंग नियम मानना होगा।
वहीं, केंद्र सरकार के जारी आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिनों के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।