गोरखपुर: किसी भी माता-पिता के लिए उसके बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी चीज होती है। बाल दिवस (Children Day 2024) के मौके पर गोरखपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट गीडा (ITM) की दो छात्रा शाम्भवी मिश्रा और तान्या प्रजापति ने बच्चों के लिए एक खास डोर बेल तैयार किया है। ये डोर बेल दरवाजे पर लगे बटन को दबाने सें नहीं, बल्कि छोटे बच्चे के दरवाजे के नजदीक आने से बजता है। छात्रों ने बच्चों के लिए ऐसा स्मार्ट चिप तैयार किया है, जिसे बच्चों के जूते-मोजे या कपड़े पर लगाया जा सकता है। इस उपकरण की मदद सें बच्चा जैसे ही घर के दरवाजे के पास पहुंचेगा, डोर बेल अपने आप बजने लगेगा।
एक आंकड़े के अनुसार, प्रति वर्ष भारत में 60 हजार बच्चे लापता होते हैं। मतलब पांच वर्षों में इनका आंकड़ा करीब तीन लाख के करीब पहुंच जाता है। इनमें छोटे बच्चों की संख्या अधिक है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए आईटीएम गीडा बी.टेक डेटा साइन्स सेकेंड ईयर की दो छात्राओं शाम्भवी मिश्रा और तान्या प्रजापति ने मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत कम खर्च में ऐसा इनोवेटिव प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके जरिए छोटे बच्चों पर ध्यान देने में उनके माता-पिता को आसानी होगी। कई बार छोटे बच्चे घर में खेलते-खेलते घर से बाहर निकल जाते हैं, जिसकी जानकारी जब तक उनके माता-पिता को होती है तब तक देर हो चुकी होती है।
आप पहले से ही हो जाएंगे सतर्क
ऐसे में कई तरह के असामाजिक तत्व या सरगना है, जो ऐसे छोटे-छोटे बच्चों को अगवा करने का काम करते हैं। ऐसे हमें अपने घरों में छोटे बच्चों पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। सोचिए आप घर में आप अपने घरेलु काम-काज में व्यस्त हों या आप गहरी नींद में सो रहे हैं तो ऐसे में आप का छोटा बच्चा या बच्ची खेलते-खेलते घर से बाहर निकल गए और आपको इसका पता देर से चलता है तब तक बहुत देर हो जाती है। मगर, अगर आप का छोटा बच्चा जैसे ही घर के गेट के पास पहुंचे और घर के अंदर अलार्म के जरिए आपको पता चल जाए तो आप सतर्क हो जाएंगे और अपने बच्चों को गेट से बाहर जाने से रोक सकते हैं।
छात्रा शाम्भवी मिश्रा ने बताया, हमारा इन्नोवेशन स्पेशली चिल्ड्रंस के लिए है, इसलिए हमने इसे प्रोजेक्ट को ‘चिल्ड्रन सेफ्टी डोर बेल’ (Children Safety Door Bell) का नाम दिया है। इसे आप बच्चों के शूज, किसी कपड़े पर लगा सकते हैं। इसे हमने विशेष रूप से छोटे-छोटे बच्चों के लिए डिजाइन किया है। चिल्ड्रन केयर स्मार्ट चिप रेडियो फ्रीक्वेंसी बेस टेक्नोलॉजी है, जिसकी कीमत सिर्फ 100 सें 200 रुपये में होगी। ये एक ट्रांसमीटर रिसीवर की तरह काम करते हैं। ट्रांसमीटर चिप बच्चों के शूज में या उनके कपड़े में लगा होता है और रिसीवर घर के दरवाजे या गेट पर लगा होगा। जैसे ही चिप लगा जूता या कपड़ा पहना बच्चा घर के दरवाजे या गेट के नजदीक आएगा, घर के दरवाजे व गेट पर लगे रिसीवर को बच्चे के जूते से निकलने वाला रेडियो सिग्नल घर के दरवाजे व गेट पर लगे रिसीवर सें मिलने लगता है, जिससे दरवाजे पर लगा रिसीवर बच्चे के जूते के नजदीक आने पर एक्टिवेट होकर दरवाजे या गेट पर तेज अलार्म ऑन कर देता है, जिससे बच्चे के माता-पिता समय रहते सतर्क हो जाएंगे और बच्चों का केयर करेंगे।
कैसे तैयार किया ‘चिल्ड्रन सेफ्टी डोर बेल’?
छात्रा तान्या प्रजापति ने बताया, इस तकनीक में हमने जीपीएस या किसी भी तरह का सिम का इस्तेमाल नहीं किया है, इसलिए ये उपकरण चिप एन्ड बेस्ट होगा। ये डिवाइस एक अलार्म का काम करेगा, ये चिप बहुत ही छोटा है। इसे बच्चों के कपड़े या जूते या मोजे में आसानी से लगाया जा सकता है। दोनों छात्राओं ने बताया कि इसे बनाने में स्मॉल जूता, रेडियो चिप, 3 वोल्ट बटन बैटरी, एलईडी लाइट, रेडियो रिसीवर जैसे अन्य उपकरण इस्तेमाल किए गए हैं। इस सेफ्टी डोर बेल को बनाने में 5 दिन का समय और 200 रुपये का खर्च आया है।
वहीं, संस्थान के निदेशक डॉ. एन के सिंह ने कहा कि लगातार बच्चों के गुमशुदा होने की खबरें अखबार व सोशल मीडिया पर देखने को मिल जाती हैं। ऐसे में बच्चों की गुमशुदगी एक गंभीर समस्या है। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए हमारे संस्थान की छात्राओं ने छोटे बच्चों के लिए एक ऐसी सिंपल चिप तैयार की है, जो बच्चों को घर से बाहर निकलने पर उनके माता-पिता को अलार्म के जरिए सूचित कर देती है। इस चिप से घर के अंदर छोटे बच्चों पर नजर रखने में आसानी होगी।