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अब हर मोबाइल में होगा साइबर सिक्योरिटी ऐप, कंपनियों को सरकार ने दी 90 दिन की डेडलाइन

अब हर मोबाइल में होगा साइबर सिक्योरिटी ऐप, कंपनियों को सरकार ने दी 90 दिन की डेडलाइन

नई दिल्‍ली: साइबर सिक्योरिटी ऐप ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) अब हर नए स्मार्टफोन में प्री-इंस्टॉल (पहले से डाउनलोड) मिलेगा। केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया कि वे स्मार्टफोन में सरकारी साइबर सेफ्टी एप को पहले से इंस्टॉल करके बेचें। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ये आदेश सोमवार (01 दिसंबर) सामने आया है। इसमें एपल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी मोबाइल कंपनियों को 90 दिन का समय दिया गया है।

इस एप को यूजर्स डिलीट या डिसेबल नहीं कर सकेंगे। पुराने फोन पर सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह एप इंस्टॉल किया जाएगा। हालांकि, यह आदेश फिलहाल पब्लिक नहीं किया गया है, बल्कि चुनिंदा कंपनियों को निजी तौर पर भेजा गया है। इसका मकसद साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर और फोन की चोरी को रोकना है। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘यह एप फर्जी IMEI से होने वाले स्कैम और नेटवर्क मिसयूज को रोकने के लिए जरूरी है।’

क्‍या है संचार साथी ऐप, कैसे करेगा मदद?

संचार साथी ऐप सरकार का बनाया साइबर सिक्योरिटी टूल है, जो 17 जनवरी 2025 को लॉन्च हुआ था। अभी यह एपल और गूगल प्ले स्टोर पर वॉलंटरी डाउनलोड के लिए उपलब्ध है, लेकिन अब नए फोन में यह जरूरी होगा। ऐप यूजर्स को कॉल, मैसेज या वॉट्सएप चैट रिपोर्ट करने में मदद करेगा। IMEI नंबर चेक करके चोरी या खोए फोन को ब्लॉक करेगा।

संचार साथी एप के बारे में अन्‍य जानकारी

अब तक 5 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड

अब तक ऐप के जरिए 7 लाख से ज्यादा फोन वापस मिले

ऐप की मदद से 3 करोड़ से ज्यादा फर्जी कनेक्शन कट चुके

ऐप की मदद से 50,000 चोरी के फोन अक्टूबर में रिकवर हुए

37 लाख से ज्यादा चोरी के डिवाइस ब्लॉक किए गए

डुप्लिकेट IMEI नंबर से बढ़ रहा साइबर क्राइम

भारत में 1.2 अरब से ज्यादा मोबाइल यूजर्स हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट है, लेकिन फर्जी या डुप्लिकेट IMEI नंबर की वजह से साइबर क्राइम बढ़ रहा है। IMEI एक 15 डिजिट का यूनीक कोड होता है, जो फोन की पहचान करता है।

अपराधी इसे क्लोन करके चोरी के फोन को ट्रैक से बचाते हैं, स्कैम करते हैं या ब्लैक मार्केट में बेचते हैं। सरकार का कहना है कि यह एप पुलिस को डिवाइस ट्रेस करने में मदद करेगा। सितंबर में DoT ने बताया था कि 22.76 लाख डिवाइस ट्रेस हो चुके हैं।

एपल की पॉलिसी में थर्ड पार्टी एप को परमिशन नहीं

इंडस्ट्री सोर्सेज का कहना है कि पहले से बातचीत न होने से कंपनियां परेशान हैं। खासकर एपल की मुश्किल बढ़ सकती है, क्योंकि कंपनी की पॉलिसी में गवर्नमेंट या थर्ड-पार्टी एप के प्री-इंस्टॉलेशन पर बैन है। पहले भी एपल का एंटी-स्पैम एप को लेकर रेगुलेटर से टकराव हुआ था।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि एपल सरकार से नेगोशिएशन कर सकती है या यूजर्स को वॉलंटरी प्रॉम्प्ट देने का सुझाव भी दे सकती है। हालांकि अभी तक किसी भी कंपनी ने आदेश के बारे में कोई कमेंट नहीं किया है।

यूजर्स को मिलेगा सीधा फायदा

यूजर्स को सीधा फायदा मिलेगा। चोरी का फोन होने पर IMEI चेक करके तुरंत ब्लॉक कर सकेंगे। फ्रॉड कॉल रिपोर्ट करने से स्कैम कम होंगे, लेकिन एप डिलीट न होने से प्राइवेसी ग्रुप्स सवाल उठा सकते हैं। यूजर कंट्रोल कम होगा। भविष्य में एप और फीचर्स जुड़ सकते हैं, जैसे बेहतर ट्रैकिंग या AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन। DoT का कहना है कि यह टेलिकॉम सिक्योरिटी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा।

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