उत्तर प्रदेश, राजनीति

लखनऊ में वाम और लोकतांत्रिक संगठन की बैठक, ईरान पर हमले की निंदा और चिंता

लखनऊ में वाम और लोकतांत्रिक संगठन की बैठक, ईरान पर हमले की निंदा और चिंता

लखनऊ: राजधानी में वामपंथी और लोकतांत्रिक संगठनों की एक संयुक्त बैठक सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के लाल कुआं कार्यालय पर आयोजित की गई। इसमें ईरान पर जारी अमेरिकी-इजराइली सैन्य हमले की तीखी निंदा की गई। बैठक ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, राष्ट्रीय संप्रभुता और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बताया। यह कहा गया कि इस प्रकार की एकपक्षीय सैन्य कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल भावना को कमजोर करती है और शक्तिशाली देशों द्वारा न्यायेतर सैन्य आक्रामकता को सामान्य बनाती है।

बैठक की अध्यक्षता उदय नाथ सिंह (ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक) ने की। बैठक में रमेश सिंह सेंगर (सीपीआई(एमएल) लिबरेशन), मधुसूदन मगन (एआईसीसीटीयू), राजीव गुप्ता (आरवाईए), सोहित यादव (जन जागरूकता अभियान), के के शुक्ला (ऑल इंडिया वर्कर्स काउंसिल) और शांतम निधि (आइसा) उपस्थित रहे।

ईरान पर सैन्‍य हमला एक घटना नहीं है

बैठक में कहा गया कि ईरान पर यह सैन्य हमला किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसे व्यापक भू-राजनीतिक वर्चस्व की रणनीति के रूप में समझा जाना चाहिए। सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई या परमाणु प्रसार जैसे तर्कों का इतिहास बताता है कि इन्हें अक्सर ऊर्जा संसाधनों, सामरिक क्षेत्रों और व्यापार मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इस संदर्भ में आयतोल्लाह अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या केवल राजनीतिक नेतृत्व को समाप्त करने की कोशिश नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा करने वाली खतरनाक प्रवृत्ति है।

बैठक में एक औपचारिक शोक प्रस्ताव पारित करते हुए आयतोल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु, ईरानी नागरिकों की मौत, तथा हमलों में घायल और मारे गए निर्दोष लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया। बैठक में ईरान की जनता के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए कहा कि सामूहिक दंड, राष्ट्रीय नेतृत्व को निशाना बनाना और व्यापक नागरिक हत्याओं का कारण बनने वाले हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रतिकूल हैं।

भारत सरकार से युद्ध विराम कराने की अपील

संगठनों ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की जान को “कोलैटरल डैमेज” कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून और जनता के उस मूल अधिकार का उल्लंघन हैं, जिसके तहत वे विदेशी सैन्य दबाव से मुक्त होकर जीने का अधिकार रखते हैं। बैठक में भारत सरकार से मांग की कि वह तत्काल युद्ध विराम, तनाव-न्यूनकरण और बहुपक्षीय कूटनीतिक पहल के पक्ष में स्पष्ट और सिद्धांतनिष्ठ रुख अपनाए। भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से उपनिवेशवाद-विरोध, गुटनिरपेक्षता, संप्रभुता के सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित रही है। ऐसे स्पष्ट सैन्य आक्रमण के सामने चुप्पी या अस्पष्टता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और नैतिक प्रतिष्ठा को कमजोर कर सकती है।

हालांकि, वक्तव्य का मुख्य केंद्र ईरान रहा, बैठक में अन्य देशों की संप्रभुता के उल्लंघन की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की, जिनमें वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के तहत हिरासत में लिए जाने की घटना भी शामिल है। संगठनों ने कहा कि संप्रभु समानता और अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करने वाली हर कार्रवाई का विरोध किया जाना चाहिए।

पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

बैठक में पश्चिम एशिया में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और प्रभावित भारतीय कामगारों व परिवारों के लिए पारदर्शी तथा समयबद्ध निकासी और सहायता योजना घोषित करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि युद्ध से उत्पन्न तेल संकट, महंगाई या आर्थिक अस्थिरता का बोझ मजदूरों, किसानों और गरीब तबकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

बैठक में शामिल संगठनों ने निर्णय लिया कि वे साम्राज्यवादी युद्ध के विरुद्ध व्यापक लोकतांत्रिक जनमत तैयार करेंगे, शांति और संप्रभुता के पक्ष में अभियान चलाएंगे तथा ईरान और अन्य देशों की जनता के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करेंगे।

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