उत्तर प्रदेश, राजनीति

मायावती का 70वां बर्थडे: योगी-अखिलेश ने दी बधाई, प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में सपा-भाजपा पर निशाना; शॉर्ट सर्किट के कारण नहीं काटा केक  

मायावती का 70वां बर्थडे: योगी-अखिलेश ने दी बधाई, प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में सपा-भाजपा पर निशाना; शॉर्ट सर्किट के कारण नहीं काटा केक  

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार (15 जनवरी) को अपने जन्मदिन पर पार्टी दफ्तर में पत्रकारों को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि सभी सरकारें बसपा द्वारा ही चलाई जा रही योजनाओं का नाम बदलकर चला रही हैं। विरोधियों ने भ्रम फैलाकर बसपा को तोड़ने का प्रयास किया है। कांग्रेस, बीजेपी सहित अन्य जातिवादी पार्टियां अलग-अलग हथकंडे अपना रही हैं। इनको मुंहतोड़ जवाब देकर यूपी में 5वीं बार बसपा की सरकार बनानी है।

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि शीतकालीन सत्र में बीजेपी और कांग्रेस के विधायक अपनी उपेक्षा से नाराज होकर जुटे थे। बसपा ने ब्राह्मण को भागीदारी दी। ब्राह्मणों को किसी का चोखा बाटी नहीं चाहिए।  ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य समाज  का बसपा सरकार पूरा ध्यान रखेगी। बसपा ने हमेशा ही उनका सम्मान किया है। बसपा ऐसी पार्टी है, जिसने सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है।

इस बार यूपी में बसपा सरकार

मायावती ने सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांशीराम के मरने पर राष्ट्रीय शोक नहीं घोषित किया। उनकी उपेक्षा की गई। दूसरी जातियों के साथ मुस्लिम समाज के साथ अन्याय हो रहा। बसपा सरकार में दंगा फसाद नहीं हुआ। हमारी सरकार में यादवों का भी ध्यान रखा गया। उन्‍होंने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। वर्तमान में सभी समाज दुखी हैं और वह बसपा की सरकार चाह रहे हैं। इस बार गुमराह नहीं होना है।

उन्‍होंने कहा कि ईवीएम में धांधली और बेइमानी की चर्चा है। ये व्यवस्था कभी भी खत्म हो सकती है। एसआईआर की काफी शिकायतें है। इससे हमें सजग रहना होगा। गठबंधन से बसपा को नुकसान होता है। खासकर अपर कास्ट का वोट जातिवादी पार्टियों को मिलता है। तभी सारी पार्टियां हमसे गठबंधन चाहती हैं। भविष्य में बसपा सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। आगे जब अपर कास्ट का वोट हमें मिलने का भरोसा हो जाएगा, तब गठबंधन करेंगे लेकिन इसमें अभी बरसों लगेंगे।

जातिवादी पार्टियों को मानसिकता बदलनी होगी

मायावती ने गठबंधन को लेकर कहा- आने वाले समय में अगर हमारी पार्टी को भरोसा हो जाएगा कि गठबंधन की इच्छुक जातिवादी पार्टियां, जातिवादी सोच को छोड़कर अपर कास्ट का वोट हमें ट्रांसफर करा सकती हैं, तब कोई सकारात्मक फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, इसमें वर्षों लगेंगे। जातिवादी मानसिकता को बदलने में समय लगेगा। जातिवादी पार्टियां जब तक ऐसा नहीं कर पातीं, हम गठबंधन का नहीं सोच पाएंगे।

यूपी के चुनावों में हमें कोई कोर कसर नहीं छोड़नी है

बसपा सुप्रीमो ने कहा- पार्टी को कमजोर करने के लिए भाजपा-कांग्रेस-सपा साम, दाम, दंड भेद अपना रही है। हर हथकंडे अपनाकर पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका मुंहतोड़ जवाब देना समय से जरूरी है। इसलिए प्रदेश में पार्टी को सत्ता में लाना जरूरी है। इसलिए इस बार यूपी के चुनावों में हमें कोई कोर कसर नहीं छोड़नी है। जनता बसपा को सत्ता में लाना चाहती है।

शार्ट सर्किट होने से रोकी गई प्रेस कॉन्फ्रेंस

हालांकि, मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शार्ट सर्किट से हाल में अफरा-तफरी मच गई। हॉल की छत पर लगी लाइट में शॉर्ट सर्किट हुआ। चिनगारी निकलने लगी और देखते ही देखते हॉल में धुआं भर गया। तुरंत ही सुरक्षाकर्मी हरकत में आए और अग्निशमन यंत्रों का इस्तेमाल कर हालात पर काबू पाया। तुरंत बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर दी गई। मायावती बिना केक काटे और मीडिया के सवाल लिए बिना ही रवाना हो गईं।

सीएम योगी ने दी जन्मदिन की बधाई

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को जन्मदिन की बधाई दी।

अखिलेश यादव ने भी मायावती को जन्मदिन की बधाई दी

वहीं, अखिलेश यादव ने मायावती को जन्मदिन की बधाई दी। लिखा, “आदरणीय सुश्री मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। उनको स्वस्थ, स्वतंत्र जीवन और सार्थक सक्रियता के लिए अनंत शुभकामनाएं। उन्होंने जीवन भर प्रभुत्वादियों के ख़िलाफ़ जाकर शोषित, वंचित, उत्पीड़ित, उपेक्षित व अपमानित समाज के मान-सम्मान और अधिकारों के लिए जो रात-दिन अनवरत संघर्ष किया और संविधान विरोधी भाजपा और उनके संगी-साथियों को जिस तरह ललकारा,वो निरंतर रहे, इस कामना के साथ, उनको जन्मदिन की पुनः बधाई।”

मायावती का 70वां बर्थडे: योगी-अखिलेश ने दी बधाई, प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में सपा-भाजपा पर निशाना; शॉर्ट सर्किट के कारण नहीं काटा केक  

दलित समुदाय की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं मायावती

मायावती का जन्म 15 जनवरी, 1956 को दिल्ली में हुआ था। वे दलित समुदाय की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और चार बार उत्तर प्रदेश की कमान संभाली। बीएसपी कार्यकर्ता उन्हें “बहन जी” कहकर बुलाते हैं। उनके जन्मदिन पर पार्टी स्तर पर केक कटिंग, गरीबों को सहायता वितरण और संगठनात्मक बैठकें होती हैं। इस बार कार्यकर्ता 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जोश भरने की तैयारी में जुटे हैं। कई जिलों में कार्यकर्ता बसपा सुप्रीमो को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने की शपथ लेंगे।

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