Mayawati News: बहुजन समाज पार्टी को बीजेपी का सहयोगी बताए जाने के आरोपों का बसपा सुप्रीमो मायावती ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि बसपा की राजनीतिक ईमानदारी व सदाशयता भी सपा व कांग्रेस जैसी विरोधी पार्टियों को अच्छी नहीं लगनी स्वाभाविक है, क्योंकि उनके चरित्र में राजनीतिक ईमानदारी का साहस नहीं है। वहीं रैली में सरकारी बसों के इस्तेमाल के आरोपों का भी पलटवार करते हुए कहा कि आधारहीन बातें करके ये दल अपना मजाक खुद ही उड़ा रहे हैं।बसपा सुप्रीमो प्रदेश कार्यालय पर यूपी और उत्तराखंड के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थीं।
’खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे’
इस दौरान उन्होंने पार्टी संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित रैली को सफल बनाने के लिए पदाधिकारियों का आभार जताया और सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करने के लिए आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में तन, मन, धन के साथ जुटने की अपील की। उन्होंने कहा कि बसपा करोड़ों गरीबों, शोषितों-पीड़ितों के खून-पसीने के सहयोग से चलने वाली पार्टी है। बसपा ने दूसरी पार्टियों की तरह वोट के राजनीतिक स्वार्थ की खातिर नहीं, बल्कि देशहित में कार्य किए हैं। किराये पर रैली व जनसभा आदि करने वाली विरोधी पार्टियों के नेता बसपा की रैली के सफल होने पर ’खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा बर्ताव कर रहे हैं, जो इनकी जातिवादी चाल, चरित्र व चेहरे का प्रमाण है।
सपा पर बोला हमला
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि अगर सपा सरकार ने बहुजन समाज में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान में बनाए नये जिलों, यूनिवर्सिटी, कालेज, अस्पताल व अन्य संस्थानों आदि के नाम बदलने के साथ इन वर्गों के आरक्षण और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्क्रिय व निष्प्रभावी नहीं किया होता तो उनका नाम 2 जून 1995 की स्टेट गेस्ट हाऊस कांड की तरह ही इतिहास के काले पन्नों में दर्ज होने से बच सकता था। अभी भी इसका पछतावा व पश्चाताप नहीं होना राजनीतिक द्वेष, छलावा व बेईमानी नहीं तो और क्या है।
गांव-गांव तक पहुंचाएं संदेश
बैठक में पदाधिकारियों ने बताया कि उनके संदेशों को गांव-गांव तक भी पहुंचाया जाएगा। यूपी विधानसभा मिशन-2027 के तहत पूर्ण बहुमत की सरकार फिर से बनाने में पूरे जी-जान से काम करेंगे। मायावती ने कहा कि गांवों में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया जाए। इस कार्य की नियमित समीक्षा हो, जिसकी रिपोर्ट सीधे मुझे भेजी जाए। वहीं दूसरी ओर मायावती ने नौशाद अली को लखनऊ मंडल में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं मुनकाद अली को पश्चिमी उप्र और अखिलेश अंबेडकर को अयोध्या की कमान सौंपी गई है।