संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सामूहिक दुष्कर्म के बाद मंदिर के हवन कुंड में महिला को जिंदा जला देने के मामले में साढ़े 7 साल बाद फैसला आया है। इसमें अदालत ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही कोर्ट ने हर दोषी पर एक लाख 7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीड़ित परिवार ने सभी दोषियों को फांसी की सजा की मांग की थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश ने बताया कि जुर्माने के 50-50 हजार रुपये मिलाकर 2 लाख रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे। बाकी की राशि सरकारी खजाने में जमा होगी। वहीं, सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों ने कोर्ट के बाहर आते ही कहा कि हम निर्दोष हैं। हमने कुछ नहीं किया, हमें फंसाया गया है। इस मामले में एक आरोपी नाबालिग है। उसका अलग से ट्रायल हो रहा है। पुलिस चारों दोषियों को मुरादाबाद जिला कारागार से कोर्ट लेकर आई थी।
ममेरा भाई बोला- फैसले से संतुष्ट, हाईकोर्ट जाने के बारे में सोचेंगे
मृतिका के ममेरे भाई ने बताया कि हमने तो चारों को फांसी की सजा देने की मांग की थी, जिससे ये जेल से छूट ही न सकें और दूसरी बहन बेटियों के साथ कोई वारदात न कर सकें। मगर, कोर्ट ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया है। हम फैसले से संतुष्ट हैं। ऊपरी अदालत में जाने के लिए अभी हम परिवार के साथ बैठकर बातचीत करेंगे, उसके बाद ही कोई फैसला होगा।
13 जुलाई, 2018 की रात हुई थी वारदात
संभल की तहसील गुन्नौर के थाना रजपुरा क्षेत्र के एक गांव में 25 साल की महिला घर में अपने दो बच्चों के साथ थी। उसका पति दिल्ली में मजदूरी करने गया था। 13 जुलाई, 2018 की रात करीब ढाई बजे गांव के रहने वाले आराम सिंह, भोना उर्फ कुंवरपाल, गुल्लू उर्फ जयवीर, महावीर और एक नाबालिग लड़का महिला के घर में घुस गए। महिला की 7 साल की बच्ची के सामने सभी ने उससे बारी-बारी से गैंगरेप किया।
महिला बेहोश हो गई, तो पांचों उसको छोड़कर भाग गए। होश में आने पर महिला ने पहले पति को कॉल की लेकिन कॉल पिक नहीं हुआ। उसके बाद डायल 100 पर कॉल की, लेकिन कॉल नहीं लगा। उसके बाद अपने ममेरे भाई को कॉल कर आपबीती बताई। जब तक भाई और बाकी घरवाले महिला के घर पहुंचते, पांचों आरोपी दोबारा उसके घर पहुंचे।
मंदिर के हवनकुंड में जिंदा जलाया
महिला को जबरिया घर से उठा ले गए। उसके घर से लगभग 20 मीटर दूर एक मंदिर के हवनकुंड में घास फूस डालकर उसे जिंदा जला दिया। आरोपियों को डर था कि अगर महिला ने किसी को कुछ बता दिया तो वे फंस जाएंगे। जब ममेरा भाई परिवार के लोगों को लेकर महिला के घर पहुंचा, तो वह वहां नहीं थी। उसकी 7 साल की बच्ची भी रोते-रोते सो गई थी। रिश्तेदार महिला को तलाशने लगे। मंदिर के हवनकुंड में उन लोगों ने आग देखी। पास गए तो देखा महिला उसमें जल रही थी।
यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। एसपी आरएम भारद्वाज सहित कई थानों का फोर्स मौके पर पहुंचा। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। घर में महिला का की-पैड फोन और कपड़े पड़े मिले थे। जांच-पड़ताल कर कपड़ों को भी लैब ले जाया गया। जहां जांच के दौरान महिला के कपड़ों पर सीमन मिला था। इसके बाद डीएनए जांच हुई।
एसपी-एसओ समेत पूरी चौकी हुई थी सस्पेंड
महिला के लास्ट कॉल के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मगर, शुरुआत में पुलिस इसे सामूहिक दुष्कर्म मानने से इनकार करती रही। मामला सुर्खियों में आने के बाद सीएम ऑफिस ने सख्ती दिखाई।
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद तत्कालीन एसपी राधे मोहन भारद्वाज (अब रिटायर) सहित रजपुरा थाने के थाना प्रभारी सहित पूरी टीसीएल चौकी को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद वहां आईपीएस अधिकारी यमुना प्रसाद को एसपी बनाकर भेजा गया।
महिला की बेटी-ममेरे भाई ने दी गवाही
सहायक जिला शासकीय एडवोकेट हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि कोर्ट में ट्रायल के दौरान महिला के ममेरे भाई और सात साल की बेटी गवाह रहे। उनकी गवाही ने केस में अहम भूमिका निभाई। दोषियों के कपड़े बरामद कर फॉरेंसिक लैब भेजे गए थे। उनके कपड़ों पर सीमन के निशान पाए गए। महिला और उसके ममेरे भाई के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी रिकॉर्ड में ली गई।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला केस
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह ने आराम सिंह, भोना उर्फ कुंवरपाल, गुल्लू उर्फ जयवीर और महावीर को धारा दोषी करार दिया। हालांकि, महिला का पूरा परिवार कोर्ट से दोषियों को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद लगाए था।