ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के 4400 किलोग्राम से अधिक वजनी संचार उपग्रह CMS-03 को लॉन्च कर दिया है। अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने बताया कि लगभग 4,410 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह है। यह उपग्रह LVM3-M5 रॉकेट के जरिये लॉन्च किया गया। जिसे इसकी भारी भारोत्तोलन क्षमता के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है।
#WATCH | Sriharikota | The launch of ISRO’s LVM3-M5 carrying the CMS-03 communication satellite from SDSC/ISRO Sriharikota.
Indian Navy’s GSAT 7R (CMS-03) communication satellite today would be the most advanced communication satellite thus far for the Indian Navy. The satellite… pic.twitter.com/nzWZWS94RK
— ANI (@ANI) November 2, 2025
भारतीय नौसेना का सबसे उन्नत सैटेलाइट
श्रीहरिकोटा के SDSC/ISRO श्रीहरिकोटा से CMS-03 संचार सैटेलाइट ले जाने वाले ISRO के LVM3-M5 को लॉन्च किया गया। भारतीय नौसेना का GSAT 7R (CMS-03) संचार उपग्रह आज भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत संचार सैटेलाइट होगा। यह सैटेलाइट नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को मज़बूत करेगा। यह सैटेलाइट भारत का अब तक का सबसे भारी संचार सैटेलाइट है, जिसका वजन लगभग 4,400 किलोग्राम है। इसमें कई स्वदेशी अत्याधुनिक घटक शामिल हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है।
जानिए क्या बोला ISRO?
बेंगलुरु में स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने बताया कि प्रक्षेपण यान को पूरी तरह से तैयार करके अंतरिक्ष यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है तथा इसे प्रक्षेपण-पूर्व कार्यों के लिए यहां दूसरे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया है। ISRO ने बताया कि LVM3 (प्रक्षेपण यान मार्क-3) ISRO का भारी वजन वहन करने वाला नया प्रक्षेपण यान है और इसका उपयोग 4,000 किलोग्राम के अंतरिक्ष यान को लागत प्रभावी तरीके से जीटीओ में स्थापित करने के लिए किया गया।
इसरो की यह पांचवी अभियानगत उड़ान
इसरो ने कहा कि LVM3-M5 पांचवीं अभियानगत उड़ान है। इससे पहले, ISRO ने पांच दिसंबर, 2018 को एरियन-5 VA-246 रॉकेट के जरिए फ्रेंच गुयाना के कौरू प्रक्षेपण केंद्र से अपने सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-11 को प्रक्षेपित किया था। लगभग 5,854 किलोग्राम वजनी जीसैट-11 इसरो द्वारा निर्मित सबसे भारी उपग्रह है।
LVM-3 से ही लॉन्च किया गया था चंद्रयान-3
ISRO ने कहा कि रविवार के मिशन का उद्देश्य यह है कि बहु-बैंड संचार उपग्रह CMS-03 भारतीय भूभाग सहित एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा। LVM-3 रॉकेट ने इससे पहले चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया था, जिसके जरिए भारत 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बन गया। LVM3 यान अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण के साथ 4,000 किलोग्राम वजन का पेलोड जीटीओ तक तथा 8,000 किलोग्राम वजन का पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा तक ले जाने में सक्षम है।