अयोध्या: रामनगरी में इस बार भी सद्भाव की होली खेली गई है। जगदगुरू परमहंस आचार्य ने बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी के साथ होली खेल एक-दूसरे को गुलाल लगाया और गले मिलकर होली की बधाई भी दी। दोनों लोगों ने रामलला की तस्वीर पर गुलाल लगाकर आनंद का अनुभव किया। तपस्वी छावनी में होली उत्सव के दौरान अनेक संत भी मौजूद रहे।
जगदगुरू परमहंस आचार्य ने कहा कि होली रामराज्य का पर्व है। यह अच्छाईयों को अपनाने का पर्व है। तपस्वी छावनी वह स्थल है, जहां रामलला बचपन में स्नान करते थे। अयोध्या राम मंदिर में विराजमान हो गए हैं तो उत्साह चरम है। अयोध्या में रामलला की होली का शुभारंभ हुआ है। रामलला मानव मात्र के आदर्श हैं।
इकबाल अंसारी बोले- हम अच्छाई को लेकर होली खेल रहे
इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या है। रंग सबके लिए बराबर है। भगवान सभी के लिए हैं वह सब कुछ देख रहे हैं। हम अच्छाई को लेकर होली खेल रहे हैं। इकबाल ने होली के गीतों पर तालियां भी बजाई और बेहद प्रसन्न नजर आए। यह अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब है। यहां कोई भेदभाव नहीं है। पूरे देश में संदेश जाना चाहिए कि रंग का कोई झगड़ा नहीं है, रंग का कोई विरोध नहीं है, सभी रंग लगने चाहिए।
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि अयोध्या में राम लला की होली की शुरुआत वैदिक रीति से हुई। समारोह की शुरुआत वैदिक मंत्रों के साथ हुई और बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने राम लला को पहला तिलक भी लगाया। उन्होंने संतों के साथ मिलकर राम लला पर फूल और गुलाल बरसाया। होली सभी बुराइयों को छोड़कर, त्याग करके और अच्छाइयों को आत्मसात करने का त्योहार है। होली ‘सत्यमेव जयते’, मानवता और एकता का त्योहार है। यहां सब लोग राम के रंग में रंगे हैं। राम जी सभी के हैं। राम के आदर्शों पर चलने के लिए अयोध्या पूरी दुनिया को संदेश दे रही है।
गौरतलब है कि इकबाल अंसारी रामजन्मभूमि-बाबरी विवाद के वादियों में से एक थे। इनके पिता हाशिम अंसारी सबसे उम्रदराज वादी थे। साल 2016 में 95 साल की उम्र में हाशिम अंसारी की मौत हो गई। इसके बाद इकबाल ने अदालत में मामले को आगे बढ़ाया था।