उत्तर प्रदेश, राजनीति

बरेली: गौशाला में भूख से गायों की मौत मामले में प्रधान पर FIR, सचिव सस्पेंड; DM बोले- नजीर बनेगी कार्यवाही

बरेली: गौशाला में भूख से गायों की मौत मामले में प्रधान पर FIR, सचिव सस्पेंड; DM बोले- नजीर बनेगी कार्यवाही

बरेली: आंवला की अनिरुद्धपुर गौशाला में भूख और बदहाली के कारण पांच गायों की मौत के मामले में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर शिकंजा कस दिया है। एक हफ्ते पहले जब गौशाला में लाशों के ढेर और तड़पती गायों की तस्वीरें वायरल हुई थीं, तब बरेली से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। अब इस मामले में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद ग्राम प्रधान से लेकर सचिव तक पर गाज गिरी है।

घटना के तुरंत बाद एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह और एसडीएम विदुषी सिंह ने मौके का मुआयना किया था। गहन जांच और साक्ष्यों के संकलन के बाद यह साफ हो गया कि गौशाला की हालत बद से बदतर होने के पीछे सीधे तौर पर स्थानीय प्रबंधन जिम्मेदार था। डीएम ने बताया कि प्रधान और सचिव को संयुक्त रूप से देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन दोनों ने ही इसमें घोर उदासीनता बरती। अधिकारियों ने माना कि अगर समय रहते चारा और इलाज मिलता, तो बेजुबानों की जान बचाई जा सकती थी।

सचिव शिप्रा सिंह निलंबित, CVO और वेटनरी ऑफिसर पर गिरेगी गाज

इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) शिप्रा सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कानूनी शिकंजा कसा गया है। कार्रवाई यहीं नहीं रुकी, प्रशासनिक हंटर अब विभाग के बड़े अफसरों की ओर मुड़ गया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. मनमोहन पांडेय के तबादले और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय वर्मा के निलंबन के लिए शासन को सिफारिश भेजी गई है। डीएम ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चूंकि यह मामला सीधे तौर पर पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. केबी त्रिपाठी ने इस कार्रवाई को केवल ‘लीपापोती’ करार देते हुए कहा कि सरकार केवल वोट के लिए गाय का नाम लेती है। विपक्ष का आरोप है कि मकर संक्रांति जैसे पावन दिन पर हुई इस ‘गौ-हत्या’ के लिए केवल छोटे कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था जिम्मेदार है।

डीएम ने कहा- लापरवाही नाकाबिले बर्दाश्त

डीएम अविनाश सिंह ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आंवला तहसील के अनिरुद्धपुर गौशाला में लापरवाही की जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है, वह बेहद गंभीर है। डीएम के मुताबिक, प्रथम दृष्टया जांच और फोटोग्राफ्स से यह स्पष्ट हुआ है कि ग्राम प्रधान और सचिव ने अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह उदासीनता बरती। गौवंश की देखभाल करना इनकी संयुक्त जिम्मेदारी थी, जिसमें ये विफल रहे। यह पूरी तरह नाकाबिले बर्दाश्त है।

​उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि दैनिक भास्कर और अन्य माध्यमों से जानकारी मिलते ही एडीएम प्रशासन और एसडीएम आंवला को मौके पर भेजा गया था। डीएम ने कहा, हमने प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और सचिव को निलंबित कर दिया है। साथ ही, दोषी पशु चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। हमारा मकसद साफ है- सरकारी योजनाओं में लापरवाही करने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी, जो भविष्य के लिए नजीर बनेगी।

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