लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय को रविवार (01 मार्च) शाम लखनऊ में पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। वह लखनऊ-सीतापुर रोड स्थित ग्राम तरैया में करंट लगने से जान गंवाने वाले संविदाकर्मी लाइनमैन परशुराम रावत के परिजनों से मिले।
सीतापुर रोड पर मिलने के बाद फतेहपुर जिले में हुई शिक्षक (BLO) मौत के बाद परिजनों से मिलने जा रहे थे। इसके पहले ही पुलिस टीम उनके पीजीआई स्थित आवास पहुंची और उन्हें रोक लिया। कांग्रेस ने कहा- सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
*श्री अजय कुमार राय जी को हाउस अरेस्ट किया गया — क्या संवेदना जताना भी अब अपराध है?*
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष श्री @kashikirai जी को मृतक शिक्षामित्र अखिलेश कुमार सविता के परिजनों से मिलने फतेहपुर जाने से पहले ही लखनऊ में हाउस अरेस्ट कर दिया गया। प्रशासन ने… pic.twitter.com/XujafEYPho
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इंस्पेक्टर ने मोबाइल पर दिखाया नोटिस
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पीजीआई इंस्पेक्टर ने अजय राय को मोबाइल फोन पर एक आदेश दिखाते हुए कहा कि ऊपर से निर्देश हैं, इसलिए उन्हें गांव जाने की अनुमति नहीं है। इस पर अजय राय ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि उनके वहां जाने से कानून-व्यवस्था की कौन सी समस्या उत्पन्न हो जाएगी?
उन्होंने कहा, “क्या मेरे जाने से वह जिंदा हो जाएगा? क्या वह वापस आ जाएगा? आखिर ऐसा क्या कारण है कि मुझे शोक व्यक्त करने भी नहीं जाने दिया जा रहा है?” उन्होंने यह भी पूछा कि यदि कोई विशेष आदेश है तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाए।
4:30 बजे था गांव पहुंचने का कार्यक्रम
प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अजय राय को सायं 4:30 बजे फतेहपुर के लिए जाना था। हालांकि, इससे पहले ही पीजीआई थाना पुलिस उनके अपार्टमेंट पहुंच गई और उन्हें बाहर न जाने की मौखिक हिदायत दी गई।
*संवेदना ही नहीं, साथ निभाने का संकल्प — कांग्रेस पार्टी*
संविदाकर्मी लाइनमैन परशुराम रावत की बिजली लाइन की मरम्मत के दौरान करंट लगने से हुई दुखद मृत्यु पर माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री @kashikirai जी, ग्राम तरैया- सीतापुर रोड, लखनऊ स्थित उनके आवास पर पहुंचे, उन्होंने शोक संतप्त… pic.twitter.com/9Q7uyFn9Ni
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कांग्रेस ने बताया ‘लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन’
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष को बिना स्पष्ट लिखित आदेश के रोका जाना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। पार्टी ने इसे विपक्षी नेताओं को जनता से दूर रखने की कोशिश बताया है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से असहज है, इसलिए प्रशासनिक दबाव के जरिए कार्यक्रमों को बाधित किया जा रहा है।