H5N1Virus: पिछले कुछ वर्षों का डेटा उठाकर देखें तो पता चलता है कि दुनियाभर में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों ने लोगों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। साल 2019 के आखिरी के दिनों में चीन से फैला कोरोना वायरस हो या निपाह-इबोला के मामले, सभी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाया है। भारत में भी कई तरह की संक्रामक बीमारियों के खतरे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान करते रहे हैं। ताजा खबरों के मुताबिक उत्तराखंड के कई हिस्सों में एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1 वायरस) के प्रकोप की पुष्टि की गई है। उत्तराखंड के दो जिले- उधम सिंह नगर और बागेश्वर में अधिकारियों ने संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए हैं।
अधिकारियों के बताया कि बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में सैंपल का परीक्षण किया गया, जिसमें अत्यधिक संक्रामक H5N1 वायरस की उपस्थिति की पुष्टि हुई है। प्रभावित क्षेत्रों के पोल्ट्री फार्मों में हजारों की संख्या में मुर्गियों की मौत ने स्थानीय अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रभावित फार्म के आसपास के एक किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया गया है। अन्य पोल्ट्री फार्मों से भी सैंपल एकत्र करके परीक्षण के लिए भेज दिए गए हैं। सभी लोगों को इस गंभीर संक्रमण से बचने के उपाय करते रहने की भी सलाह दी जा रही है।
एवियन इन्फ्लूएंजा को लेकर अलर्ट
खबरों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में कर्मचारियों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, हाथों को सैनेटाइज करते रहने जैसे सलाह दिए गए हैं। पोल्ट्री फॉर्म्स के आसपास कोविड जैसी सख्ती देखने को मिल रही है। एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू के संक्रमण को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी गंभीर मानते हैं। बर्ड फ्लू को आमतौर पर मुर्गियों और पक्षियों में संक्रमण फैलाने वाला माना जाता रहा है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इससे पहली बार गायों, इंसानों को भी संक्रमित देखा गया है। इसी साल फरवरी में आई एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं की टीम ने पहली बार चूहों में भी इससे संक्रमण की पुष्टि की थी।
भारत सहित कई देशों में देखा जाता रहा है संक्रमण का खतरा
हाल के महीनों में दुनिया के कई देशों में बर्ड फ्लू का लगातार प्रकोप देखा जाता रहा है। जुलाई में कंबोडिया के कुछ हिस्सों में इंसानों में बर्ड फ्लू के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। अमेरिका-ब्रिटेन के भी कई शहरों से लगातार एवियन इन्फ्लूएंजा की खबरें आती रही हैं। भारत की बात करें तो इस साल फरवरी में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बर्ड फ्लू संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि की सूचना मिली थी। जनवरी के आखिरी हफ्तों में यहां बड़ी संख्या में मुर्गियों की अकारण मौत के बाद किए गए परीक्षण में एच5एन1 वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों के आसपास के 10 किलोमीटर के दायरे को ‘अलर्ट जोन’ घोषित कर दिया था।
कोविड से 100 गुना अधिक संक्रामक है ये वायरस
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बर्ड फ्लू के संभावित रूप से तीव्र प्रसार को लेकर चिंता व्यक्त की है, इसके कारण बड़ी संख्या में मौतों की भी आशंका जताई जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोविड-19 से 100 गुना अधिक संक्रामक और खतरनाक हो सकता है। हाल ही में बर्ड फ्लू के नए म्यूटेशनों को लेकर एक ब्रीफिंग के दौरान ‘नई महामारी की आशंका’ के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, वायरस एक ऐसे बिंदु के करीब पहुंच रहा है जहां यह दुनियाभर में महामारी ला सकता है। पिट्सबर्ग में जाने-माने बर्ड फ्लू विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुचिपुड़ी ने चेतावनी दी थी कि एच5एन1 अब इंसानों के लिए भी खतरा बढ़ाता जा रहा है, इसकी मृत्युदर काफी अधिक हो सकती है।
इंसानों के लिए घातक हो सकता है संक्रमण
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने पहले ही एक रिपोर्ट में कहा था कि इंसानों में एच5एन1 संक्रमण के कारण मृत्यु दर बहुत अधिक हो सकती है, 50% से अधिक लोगों की संक्रमण से मौत हो जाती है। हालांकि इंसानों में मामले काफी दुर्लभ हैं और आमतौर पर संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से होते हैं। इसके लक्षण बुखार और सांस लेने में तकलीफ से लेकर कई अंगों के फेलियर तक हो सकते हैं। अब तक इस खतरनाक संक्रमण से बचाव को लेकर कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या लक्षित उपचार उपलब्ध नहीं है। संक्रमण के बढ़ते मामलों और संभावित महामारी के जोखिमों ने लोगों की चिंता और वैक्सीन की आवश्यकता दोनों को बढ़ा दिया है।