सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मनरेगा गरीब मजदूरों की रीढ़ थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे धीरे-धीरे खत्म करने का काम किया है। पहले जहां केंद्र 90 फीसदी और राज्य 10 फीसदी खर्च करता था, अब राज्यों पर 40 फीसदी का बोझ डाल दिया गया है। सरकार देश में नफरत बांटने का काम कर रही है। यहां हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है। अगर आज इंदिरा गांधी होतीं तो बांग्लादेश को वैसा ही जवाब देतीं, जैसा उन्होंने पाकिस्तान को देकर बांग्लादेश का निर्माण कराया था।
दरअसल, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के जन्मदिन को मंगलवार को “संकल्प दिवस” के रूप में मनाया गया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में इमरान मसूद ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर केक काटा। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी का जन्मदिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। कांग्रेस आने वाले 100 दिनों में मंडल स्तर से लेकर गांव-गांव तक जाएगी और लोगों से सीधा संवाद करेगी। कांग्रेस को दोबारा उसी “स्वर्णिम काल” में पहुंचाने का संकल्प लिया गया है, जो पार्टी का गौरवशाली इतिहास रहा है।
गरीबों की कमर टूट रही
इमरान मसूद ने कहा कि अधिकतर राज्यों के पास इतना पैसा ही नहीं है कि वे मनरेगा चला सकें। नतीजा यह होगा कि यह योजना पूरी तरह दम तोड़ देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि छह-छह महीने तक मजदूरों का भुगतान बकाया रहता है, जिससे गरीबों की कमर टूट रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि 2014 में मोदी ने मनरेगा को “कांग्रेस की विफलताओं का स्मारक” बताया था, लेकिन कोविड काल में उसी योजना ने करोड़ों गरीबों को सहारा दिया। अब 125 दिन में रोजगार देने की बात की जा रही है। लेकिन पैसा कहां से आएगा, यह सरकार नहीं बता रही।
अपने बयान में सांसद इमरान ने कांग्रेस के 140 साल के इतिहास को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग पूछते हैं कि कांग्रेस ने 70 साल में क्या किया, वे 1950 के आसपास की भारत की हालत भूल जाते हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा, हरित क्रांति, औद्योगीकरण, बड़े बांध, बिजली परियोजनाएं, इसरो और एम्स जैसे संस्थानों की नींव रखी। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सपनों को आरक्षण के जरिए लागू करने का श्रेय भी उन्होंने नेहरू को दिया।
इंदिरा गांधी का किया जिक्र
इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर गरीबों को साहूकारों के शोषण से बचाया और “गरीबी हटाओ” का नारा देकर रोजगार की दिशा में काम किया। राजीव गांधी के कार्यकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दलितों और वंचितों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया गया।
शिक्षा के मुद्दे पर इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया है और गरीब के लिए शिक्षा एक सपना बन गई है। संविदा व्यवस्था के जरिए आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है और देश के संसाधन चंद मित्रों को सौंपे जा रहे हैं।
हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा
धर्म के मुद्दे पर बोलते हुए इमरान मसूद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्तिगत मामला है, लेकिन सरकार देश में नफरत बांटने का काम कर रही है। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत सरकार की चुप्पी बेहद चिंताजनक है। अगर बांग्लादेश के खिलाफ सख्त कदम उठाने हैं तो सबसे पहले वहां बिजली की आपूर्ति रोकनी चाहिए। जहां हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है, वहां भारत सरकार डीजल देने के समझौते कर रही है।
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "पहले, बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं की चिंता करें कि वहां हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है…" pic.twitter.com/wQNoA2VJzo
— IANS Hindi (@IANSKhabar) January 12, 2026
इमरान मसूद ने कहा कि अगर आज इंदिरा गांधी होतीं तो बांग्लादेश को वैसा ही जवाब देतीं, जैसा उन्होंने पाकिस्तान को देकर बांग्लादेश का निर्माण कराया था SIR और वोट कटने के मुद्दे पर भी इमरान मसूद ने बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर के जरिए करोड़ों वोट काटे जा रहे हैं और लाखों लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे फॉर्म-6 और जरूरत पड़ने पर अन्य फॉर्म जमा कराकर अपने वोट के अधिकार की रक्षा करें।
यूपी की कानून व्यवस्था पर टिप्पणी
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि यहां की स्थिति बेहद दु:खद है और यह सरकार की नाकामी को दिखाती है। अपने बयान के अंत में इमरान मसूद ने प्रियंका गांधी की दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी ताकत और मेहनत के साथ पार्टी को फिर से उसके गौरवशाली इतिहास की ओर ले जाने के लिए संघर्ष करेंगे। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस और विवाद का कारण बनता दिख रहा है।