Gorakhpur University: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने पूर्वांचल क्षेत्र में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की है। भारतीय भेषजी परिषद (Pharmacy Council of India – PCI) द्वारा विश्वविद्यालय के एम.फार्मा (M.Pharm) कार्यक्रम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। पीसीआई द्वारा जारी निर्णय पत्र के अनुसार, विश्वविद्यालय को एम.फार्मा (फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री एवं फार्मास्यूटिक्स) पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की अनुमति दी गई है। साथ ही परिषद ने नियमानुसार शिक्षण, गैर-शिक्षण एवं तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति तथा एईबीएएस पोर्टल पर आवश्यक विवरण अद्यतन करने के निर्देश भी दिए हैं।
यह स्वीकृति पूर्वांचल के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब उन्हें उच्च स्तरीय फार्मेसी शिक्षा एवं शोध के लिए महानगरों या अन्य राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। डीडीयूजीयू में एम.फार्मा कार्यक्रम प्रारंभ होने से क्षेत्र में औषधीय अनुसंधान, दवा निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा फार्मास्यूटिकल उद्योग से जुड़ी संभावनाओं को नई गति मिलेगी। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय पूर्वांचल को एक सशक्त शैक्षणिक एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पहले से ही डी.फार्मा एवं बी.फार्मा कार्यक्रमों का सफल संचालन कर रहा है तथा हाल ही में फार्मेसी विषय में पीएच.डी. कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है। एम.फार्मा की स्वीकृति से अब शिक्षण से लेकर उच्च स्तरीय शोध तक की समग्र शैक्षणिक श्रृंखला विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध होगी।