उत्तर प्रदेश, राजनीति

सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो, इस तरह कब तक बच पाओगे: अविमुक्तेश्वरानंद

सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो, इस तरह कब तक बच पाओगे: अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज: प्रयागराज माघ मेले में स्‍नान के लिए जाते समय रथ रोकने के विरोध में धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया। उनसे 24 घंटे में यह साबित करने को कहा है कि वे ही असली शंकराचार्य हैं। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर जो गलती प्रशासन से हुई है, उसको ये लोग पीछे करना चाह रहे। सुप्रीम कोर्ट का गलत हवाला देकर ये लोग कब तक बच पाएंगे? खुद सरकार ने महाकुंभ में एक पत्रिका छापी थी, उसमें मुझे शंकराचार्य के रूप में छापा था।

सोमवार रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार माघ मेला में शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। उन्होंने शंकराचार्य के शिष्यों से नोटिस लेने के लिए कहा। शिष्यों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। कहा- इतनी रात में कोई नहीं हैं। सुबह आइएगा। कानूनगो अनिल कुमार मंगलवार सुबह फिर शंकराचार्य शिविर पहुंचे। वहां गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। दरअसल, ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य की पदवी को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच विवाद है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसी बात को आधार बनाकर प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया।

शंकराचार्य ने कहा– अखिलेश ने मुझसे माफी मांगी थी

शंकराचार्य ने कहा कि 2015 में मुझे लाठी पड़ी थी, लेकिन अखिलेश यादव ने आकर मुझसे छमा याचना मांगी थी। उन्होंने कहा था कि मेरे अधिकारियों से गलती हो गई है। इस पर मैंने माफ कर दिया था। मुझे स्नान नहीं करने दिया। मैं इस उम्मीद पर आकर बैठ गया कि बड़े अधिकारियों को मौका दें। क्या पता आकर माफी मांग लें। रात 1 बजे तक बैठा रहा, कोई नहीं आया। इस पर मैं सुबह उठा।

स्नान के लिए बिना अन्न-जल ग्रहण किए निकला था

शंकराचार्य ने यह भी बताया कि उन्होंने मौनी अमावस्या की रात 1 बजे से अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था। क्योंकि उसी दिन स्नान के लिए जाना था। सुबह स्नान के लिए बिना अन्न-जल ग्रहण किए ही निकला था। मुझे स्नान नहीं करने दिया गया और वापस लाकर छोड़ दिया गया। मुझे लगा कि अधिकारी शायद अपनी गलती मान जाएंगे और उन्हें ससम्मान गंगा स्नान कराने ले जाएंगे। इस वजह से मैंने रात तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था।

SC ने पट्टाभिषेक पर रोक की बात कही है

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में पट्टाभिषेक पर रोक लगाने की बात कही गई है। यह कहीं नहीं कहा गया कि मैं अपने नाम के आगे शंकराचार्य का इस्तेमाल नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करके मेला प्राधिकरण ने आदेश की अवहेलना की है। यह भी बता दें कि इस आदेश के खिलाफ भी एक कंप्लेंट के सुप्रीम कोर्ट में गया है, जो अभी विचाराधीन है।

शंकराचार्य के वकील पीएन मिश्रा ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई, तो इसका नोटिस मेला प्राधिकरण कैसे दे सकता है? कोर्ट का कंटेम्प्ट क्या है, इसका निर्णय कोर्ट करेगा। 14 अक्टूबर, 2022 का आदेश ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पर पट्टाभिषेक को लेकर है ना कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के द्वारा शंकराचार्य की उपाधि का इस्तेमाल करने को लेकर। उन्होंने कहा कि 14 साल के नाबालिग वेदपाठियों को जिस तरह मारा-पीटा गया, उसे लेकर भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

शंकराचार्य ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा

शंकराचार्य ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुझे कॉल किया था। कहा था कि वो मेरे साथ हैं। मैंने कहा कि आपका राजनीति में जो मुद्दा फायदे का रहता है, उसमें सपोर्ट में आते हैं। मैंने उनको बताया कि आपसे गोरक्षा के लिए बोला था, आपने एक साल से जवाब नहीं दिया।

हम माघ मेले में पट्टा अभिषेक नहीं कर रहे

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया जा रहा, उसमें शंकराचार्य का नाम न लगाएं, वो कहां लिखा है। हम माघ मेले में कोई पट्टा अभिषेक तो कर नहीं रहे हैं। केंद्र सरकार कोर्ट में पार्टी बनी है। 3 साल से कोई फैसला नहीं कराया गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि नोटिस इसलिए दिया गया, क्योंकि हम लोग गो-हत्या बंद करने की मांग कर रहे हैं। एक नोटिस हमारी तरफ से भी प्रशासन को भेजा जा रहा है।

मैं हूं ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य

इससे पहले, सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- शंकराचार्य वो होता है जिसे बाकी 3 पीठ शंकराचार्य कहते हैं। 2 पीठ हमें शंकराचार्य कहते हैं। पिछले माघ मेले में हमको साथ लेकर स्नान कर चुके हैं। अब आपको किस प्रमाण की जरूरत हैं। क्या ये प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं या नहीं। भारत के राष्ट्रपति को भी अधिकार नहीं है कि वो तय करे कि कौन शंकराचार्य होगा। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करेगा। पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा। वो साइलेंट हैं। हम निर्विवाद रूप से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं। अगर कोई कहता है कि मैं ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य हूं तो आकर बात करे।

शंकराचार्य की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जमकर हंगामा भी हुआ। टीवी चैनल और अखबार के पत्रकारों से यूट्यूबर्स भिड़ गए। इसके बाद जमकर कहासुनी हुई। यहां तक कि पुलिस के पहुंचने पर भी विवाद जारी रहा। तुरंत ही इस मामले में शंकराचार्य के शिष्य सामने आए। आरोप लगाने लगे कि प्रशासन जानबूझकर ये सब करा रहा है, जिससे शंकराचार्य की बात मीडिया वालों के सामने न पहुंचे।

अजय राय बोले– क्या योगी-मोदी तय करेंगे शंकराचार्य की उपाधि?

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने जौनपुर में बड़ा हमला बोला। अजय राय ने तंज कसते हुए सवाल किया- क्या अब मोदी-योगी सरकार शंकराचार्य की उपाधि देगी? प्रशासन ऐसे पेश आ रहा है, जैसे संतों की पहचान वही तय करेगा। इन लोगों ने संतों को चोटी पकड़कर खींचा… थाने में पिटवाया… भगवा कपड़े फाड़े… और खुद को सनातन की सरकार कहते हैं। अगर शंकराचार्य पालकी से नीचे उतरते, तो उनके साथ कोई अनहोनी भी हो सकती थी। ये घटना 150 करोड़ सनातनियों का अपमान है। कांग्रेस के राज में कभी संतों का अपमान नहीं हुआ।

माघ मेला प्रशासन का आचरण बेहद निंदनीय है। उन्होंने शंकराचार्य की उपाधि को लेकर जारी किए गए नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई और पूछा कि जब महाकुंभ के दौरान शंकराचार्य प्रयागराज आए थे, तब जमीन आवंटन या उनकी हैसियत पर सवाल क्यों नहीं उठे?

मौनी अमावस्या पर हुआ था अविमुक्तेश्वरानंद का पुलिस से विवाद

मौनी अमावस्या यानी 18 फरवरी को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पैदल संगम के लिए जाने को कहा। लेकिन शिष्य नहीं माने और पालकी आगे बढ़ाने लगे। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। हाथापाई हुई।

पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। नाराज शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और शिष्यों को छुड़ाने की मांग करने लगे। अफसरों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। करीब दो घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी को खींचकर संगम से करीब 1 किमी दूर ले जाया गया।

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