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जम्‍मू-कश्‍मीर के किश्तवाड़ में आपदा: अब तक 52 मौतें, सर्च-रेस्क्यू के लिए पहुंची NDRF टीम

जम्‍मू-कश्‍मीर के किश्तवाड़ में आपदा: अब तक 52 मौतें, सर्च-रेस्क्यू के लिए पहुंची NDRF टीम

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के चसोटी गांव में 14 अगस्त को बादल फटने से कई लोग पहाड़ से आए पानी और मलबे की चपेट में आ गए। इस हादसे में अब तक 52 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें से 21 शवों की पहचान की जा चुकी है। अब तक 167 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 38 की हालत गंभीर है, जबकि 100 से ज्यादा लोग लापता हैं।

हादसा उस समय हुआ, जब हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा के लिए किश्तवाड़ में पड्डर सब-डिवीजन में चसोटी गांव पहुंचे थे। यह यात्रा का पहला पड़ाव है। बादल वहीं फटा है, जहां से यात्रा शुरू होने वाली थी। यहां श्रद्धालुओं की बसें, टेंट, लंगर और कई दुकानें थीं। सभी बाढ़ में बह गए।

मलबे में मिल रहा लोगों का सामान

जम्मू-कश्मीर में 14 अगस्त को बादल फटने के बाद किश्तवाड़ के चिशोटी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ के बाद के हालात। यहां मलबे में पड़ा महिला का हैंडबैग।

NDRF की टीम सर्च-रेस्क्यू के लिए पहुंची

नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स (NDRF) की एक टीम शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चोशिती गांव पहुंची। किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर पंकज शर्मा ने बताया-NDRF की टीम गांव में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई है। NDRF टीम गुरुवार देर रात गुलाबगढ़ पहुंच गई थी। हालांकि, खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर नहीं चल सका, इसलिए टीम उधमपुर से सड़क मार्ग से आई।

Cloudburst In Kishtwar Jammu Kashmir Live Updates: Death Toll, Injured,  Rescue Operation News In Hindi - Amar Ujala Hindi News Live - Kishtwar  Cloudburst Live:किश्तवाड़ में चार जगह बादल फटे, 52 की

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि दो और टीमें रास्ते में हैं। वे भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होंगे। राष्ट्रीय राइफल्स के जवान भी ऑपरेशन में शामिल हो गए हैं।डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि 60-60 जवानों वाली पांच सैन्य दल, कुल 300 जवान, व्हाइट नाइट कोर की मेडिकल टीम, पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर लोगों की जान बचाने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रयास कर रही हैं।

GMC-जम्मू में 50 बिस्तरों वाला हॉस्पिटल तैयार

जीएमसी-जम्मू 50 बिस्तरों, 20 वेंटिलेटर बिस्तरों और पांच ऑपरेशन थिएटरों के साथ पूरी तरह से तैयार है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सा दल, जिनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, न्यूरोसर्जन, क्रिटिकल केयर एनेस्थेटिस्ट और मैक्सिलोफेशियल सलाहकार शामिल हैं, स्टैंडबाय पर हैं। जीएमसी-जम्मू ब्लड बैंक ने किसी भी आपात स्थिति के लिए 200 से ज्यादा यूनिट ब्लड रखा है। मचैल माता मंदिर के पास हुए हादसे के बाद से अब तक 167 घायल लोगों को बचाया गया है, जबकि 69 लोग लापता हैं।

पीजीआई चंडीगढ़ से जम्मू पहुंचेगी डॉक्टरों की स्पेशल टीम

पीजीआई चंडीगढ़ से विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम मेडिकल सपोर्ट और गहन देखभाल क्षमताओं को मजबूत करने के लिए जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंच रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के अनुसार, बादल फटने वाली जगह के पास स्थित एक उप-ज़िला अस्पताल में 13 डॉक्टरों और 31 पैरामेडिक्स की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

चश्मदीद बोले- दौड़ लगाई लेकिन मलबे में फंस गए

घायलों में से एक विशाल मेहरा ने बताया, मैं जम्मू से मचैल यात्रा के लिए आया था। हम दर्शन के बाद लौट रहे थे और चशोटी में रुके थे। हमारे समूह का एक हिस्सा थोड़ा पीछे रह गया था। हम चाय पी रहे थे और जैसे ही हमने चाय खत्म की, सेना के जवानों ने हमें वहां से भागने को कहा। हम दौड़े, लेकिन हम मलबे में फंस गए। मेरी बहन और भतीजा लापता हैं।

मचैल माता मंदिर के रास्‍ते पर पहला गांव

चशोटी किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर और मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पहला गांव है। यह जगह पड्डर घाटी में है, जो 14-15 किलोमीटर अंदर की ओर है। इस इलाके के पहाड़ 1,818 मीटर से लेकर 3,888 मीटर तक ऊंचे हैं। इतनी ऊंचाई पर ग्लेशियर (बर्फ की चादर) और ढलानें हैं, जो पानी के बहाव को तेज करती हैं।

मचैल माता तीर्थयात्रा हर साल अगस्त में होती है। इसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं। यह 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलेगी। यह रूट जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी लंबा है और इसमें पड्डर से चशोटी तक 19.5 किमी की सड़क पर गाड़ियां जा सकती हैं। उसके बाद 8.5 किमी की पैदल यात्रा होती है।

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