चेन्नई: तमिलनाडु की मदुरै सेशन कोर्ट ने सोमवार (06 अप्रैल) को सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बताया। कहा कि अत्यधिक बर्बरता और सत्ता के दुरुपयोग का मामला है। कोर्ट ने सभी दोषियों को मृतकों के परिजन को 1 करोड़ 40 लाख रुपये मुआवजा देने को कहा।
यह मामला साल 2020 का है। छह साल तक सुनवाई चली। इस मामले में कुल 10 आरोपी थे। एक की कोविड के दौरान मौत हो गई। दरअसल,19 जून 2020 को पुलिस ने मोबाइल कारोबारी पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को हिरासत में लिया था। आरोप था कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान दुकान खुली रखी थी।
थाने में रातभर मारपीट का आरोप
इसी मामले में दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां से न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जहां कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि दोनों के साथ थाने में रातभर मारपीट की गई। उनके शरीर पर गंभीर चोट और खून बहने के निशान थे।
CBI जांच में हिरासत में पिटाई की पुष्टि हुई
मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच राज्य की सीबी-सीआईडी से लेकर सीबीआई को सौंपी गई थी। एजेंसी ने एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल ने बयान दिया कि पिता-पुत्र को पूरी रात पीटा गया था। थाने में टेबल और लाठियों पर खून के निशान थे। यह गवाही मामले में अहम सबूत बनी।
फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जी. मुथुकुमारन ने सीबीआई की दलील को माना कि हिरासत में दोनों को योजनाबद्ध तरह से टॉर्चर किया गया, इसलिए अधिकतम सजा दी गई। हालांकि, जांच में यह भी सामने आया कि सथानकुलम थाने का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित नहीं रखा गया। रिकॉर्डिंग रोजाना अपने आप डिलीट हो जाती थी, जिससे महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिल पाए।
नौ पुलिसकर्मियों में एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर
दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन, हेड कॉन्स्टेबल एस. मुरुगन और ए. समदुरई है। साथ ही कॉन्स्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु शामिल हैं। मामले में 10वें आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की ट्रायल के दौरान कोविड से मौत हो गई थी।