बरेली: पुलिस अधीक्षक सिटी मानुष पारीक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स का सोच समझ कर इस्तेमाल करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स का इस्तेमाल करें, लेकिन ध्यान रखें कि ये सोशल मीडिया हमारा इस्तेमाल न करें। फ्री में उपलब्ध सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के लिए हमारी प्रोफाइल, हमारा कंटेंट यानी डेटा महत्वपूर्ण है। इसी के जरिये हम साइबर क्राइम का शिकार होते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी प्राइवेसी कभी सार्वजनिक न करें। अपनी हर बात, हर गतिविधि को जानकारी इन प्लेटफार्म पर साझा करने से परहेज करें। फिर भी किसी भी तरह का साइबर क्राइम होने पर 24 घंटे के अंदर हेल्पलाइन नंबर 1930 और 1090 पर इसकी शिकायत करें या Cybercrime.gov.in पर आनलाइन कंप्लेंट करें। सतर्कता से ही साइबर क्राइम से बचा जा सकता है।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को साइबर क्राइम पर कार्यशाला हुई। इसमें एमबीबीएस के विद्यार्थियों को एसपी सिटी मानुष पारीक ने साइबर क्राइम की जानकारी दी। उन्होंने पिछले महीने नेपाल में पिछले महीने हुए हिंसक प्रदर्शन का उदाहरण दिया। कहा कि यह जेन जी का प्रदर्शन था। यह पीढ़ी सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म चेक करती है और रात में सोने से पहले तक उसी पर एक्टिव रहती है। इस आभासी दुनिया में आइडियोलॉजी और पॉलिटिक्स के लिए लगातार हैशटैग ट्रेंड होते हैं, जिनका प्रभाव और दुष्प्रभाव दिमाग पर पड़ता है। बिना सोचे समझे किसी भी हैश टैग को लाइक करने, अपनी हर बात, हर गतिविधियों को जानकारी इन प्लेटफार्म पर साझा करने और अपनी प्राइवेसी सार्वजनिक करने से साइबर क्राइम का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा साइबर अपराधी सक्रिय
साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। ये क्राइम ये पिग बुचरिंग, साइबर बुलिंग, साइबर स्टॉकिंग, साइबर एक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट जैसे रूप में होता है। इससे बचने के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। जागरूक रह कर इंटरनेट और सोशल प्लेटफार्म एप्लीकेशंस का सावधानी से इस्तेमाल करें। अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के अलग-अलग पासवर्ड रखें और उन्हें हर महीने बदलते रहें। अपने नाम, जन्मतिथि पर आधारित पासवर्ड न बनाएं। समय समय पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स को अपडेट करते रहें। किसी भी एप्लिकेशन को डाउनलोड करते समय एप प्रोवाइडर को मोबाइल की फुल एक्सेस न दें। अपनी गैलरी, कांटैक्स, माइक और कैमरे का एक्सिस भी न दें। टू फैक्टर वेरिफिकेशन अपडेट करें। कोई भी अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अनजान लोगों के साइबर अपराधी होने की आशंका ज्यादा होती है।

एसपी सिटी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म के अकाउंट सेटिंग में जाकर बदलाव करें और अपनी प्रोफाइल को पब्लिक के लिए ओपन न करें। अपनी लोकेशन सार्वजनिक न करें। अनजान वीडियो कॉल को एक्सेप्ट न करें। सार्वजनिक वाई-फाई के इस्तेमाल से परहेज करें। रात में सोने से पहले घर का वाई-फाई बंद करें और मोबाइल का इंटरनेट भी ऑफ कर दें। संभव हो तो मोबाइल भी स्विच आफ करें तो ज्यादा बेहतर है। साइबर अपराधी आपका नाम, फोन नंबर और आधार का इस्तेमाल कर के जरिये फ्रॉड को अंजाम देते हैं। ऐसे में ओटीपी शेयर न करें। सबसे बड़ी बात सोशल मीडिया हाइजीन को समझें। अपनी हर बात, दुख दर्द, खुशी, हर गतिविधि को जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा न करें।
लड़कियों को साइबर स्टॉकिंग से किया सावधान
एसपी सिटी मानुष पारीक ने लड़कियों को साइबर स्टॉकिंग से सावधान किया। कहा कि किसी को भी वीडियो और फोटो कभी शेयर न करें। अश्लील साइट पर फोटो या वीडियो होने पर डरें नहीं। इसकी शिकायत साइबर क्राइम थाने में या dmca.com साइट पर ऑनलाइन करें। फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने की शिकायत भी वायलेशन ऑफ प्राइवेसी की वेबसाइट पर की जा सकती है। किसी भी तरह का साइबर क्राइम होने पर 24 घंटे के अंदर हेल्पलाइन नंबर 1930 और 1090 पर इसकी शिकायत करें या Cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन कंप्लेंट करें। कार्यशाला में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला ने एसपी सिटी मानुष पारीक का स्वागत किया और स्मृति चिह्न प्रदान किया। इस मौके पर डीन यूजी डॉ. बिंदु गर्ग, डॉ. समता तिवारी, डीएसडब्ल्यू डॉ. क्रांति कुमार और ऑफिस सुपरिटेंडेंट विनीत शर्मा मौजूद रहे।