उत्तर प्रदेश, राजनीति

यूपी में रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ पर विवाद, इमरान मसूद ने फिल्‍म को बताया बकवास

यूपी में रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' पर विवाद, इमरान मसूद ने फिल्‍म को बताया बकवास

सहारनपुर: उत्‍तर प्रदेश में फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में अतीक अहमद पर किरदार और नोटबंदी को दिखाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फिल्म को बकवास बताया। उन्‍होंने कहा कि इस फिल्म को कौन देखेगा और कौन इस पर यकीन करेगा।

इमरान मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी कर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी, जबकि फिल्म में इसे मास्टर स्ट्रोक के तौर पर दिखाया गया है। नोटबंदी मास्टर स्ट्रोक नहीं, बल्कि देश को नुकसान पहुंचाने वाला फैसला था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिन फैसलों की आलोचना की थी, आज वही सही साबित हो रहे हैं। अगर फिल्मों में महिमामंडन ही करना है तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिखाया जाए और बताया जाए कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को कैसे जवाब दिया था।

सरकार के पास अब विकास के मुद्दे नहीं

इमरान मसूद ने कहा कि सरकार के पास अब विकास के मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए समाज में नफरत फैलाने की राजनीति की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि कब तक हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लोगों को बांटते रहेंगे। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी उद्योगपतियों को बचाने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं।

एसटी हसन बोले– अब फिल्में सियासत के लिए बन रही हैं

एसटी हसन ने कहा कि डॉन दाऊद इब्राहिम के ISI से कनेक्शन की बातें तो सुनी जाती रही हैं, लेकिन अतीक अहमद के मामले में अब तक किसी भारतीय जांच एजेंसी ने ऐसा कोई खुलासा नहीं किया है। विवाद खड़ा कर सिर्फ फिल्म चलाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि आज फिल्में सियासत के लिए बनाई जा रही हैं। समाज को कोई सकारात्मक संदेश नहीं दिया जा रहा। मुझे लगता है कि फिल्म वाले नफरत फैलाने के लिए पार्टी से पैसा लेते हैं। ऐसी फिल्में हिंदू-मुस्लिम के ताना-बाना को तोड़ने के लिए बनाई जा रही हैं।

राजीव राय बोले– चुनाव के समय ही ऐसी फिल्में आती हैं

सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है, लेकिन जब भी चुनाव आते हैं, ऐसी फिल्में जानबूझकर रिलीज की जाती हैं ताकि माहौल प्रभावित किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस तरह की फिल्मों को परोक्ष समर्थन देती है और ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों का उदाहरण भी दिया।

क्यों खड़ा हुआ विवाद?

दरअसल, फिल्म में साल 2016 में हुई नोटबंदी को दिखाया गया है। साथ ही इसमें माफिया अतीक अहमद पर आधारित एक किरदार ‘आतिफ अहमद’ को फिल्माया गया है। इस किरदार को सलिम सिद्दीकी ने निभाया है। आतिफ अहमद का लुक, कद-काठी, मूंछ और स्टाइल अतीक अहमद से हू-ब-हू मिलता-जुलता दिखाया गया है। फिल्म में किरादर आतिफ अहमद का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कनेक्शन दिखाया गया है। उसे जेल में रहते हुए भी अपना पूरा अपराधी नेटवर्क चलाते हुए दिखाया गया है।

फिल्म के मुताबिक, 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले हवाला के जरिए पाकिस्तान से नकली नोटों की बड़ी खेप भारत लाई जानी थी। इस किरदार को प्रदेश में पैसा बांटने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन सरकार को इसकी भनक लग जाती है। इसके बाद नोटबंदी का ऐलान कर पूरे प्लान को फेल कर दिया जाता है। फिल्म में माफिया की हत्या का सीन भी दिखाया गया है। इसके अलावा, पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार पर आधारित किरदार को भी शामिल किया गया है। इसमें दिखाया गया है कि एनएसए बने किरदार उन्हें अतीक से जुड़ी अपराधिक प्रोफाइल दिखा रहे हैं।

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