नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने साइबर सिक्योरिटी ऐप संचार साथी (Sanchar Saathi) पर बड़ा बयान दिया है। अब सरकार ने फोन में इस ऐप के प्री-इंस्टॉलेशन को जरूरी नहीं बताया है। दूरसंचार मंत्रालय ने एक्स (X) पर एक पोस्ट जारी कर इस एप की प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को हटाने की जानकारी दी है।
दूरसंचार मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर की गई पोस्ट में कहा- “सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा का लाभ देने के उद्देश्य से सरकार ने सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी एप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य किया था। यह एप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद सिर्फ नागरिकों को साइबर दुनिया के अपराधियों से बचाना है… संचार साथी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन को हटाने का फैसला लिया है।”
Government lifts mandatory pre-installation of Sanchar Saathi App
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— DoT India (@DoT_India) December 3, 2025
Apple ने जताई थी असहमती
बता दें कि केंद्र सरकार के इस कदम को एपल के फैसले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 28 नवंबर को सरकार से आदेश मिलने के बाद स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल (Apple) ने इसका पालन करने से इंकार कर दिया था। कंपनी ने कहा था कि यह कदम iPhone यूजर्स के निजी डेटा को खतरे में डाल सकता है। एपल ने रॉयटर्स के हवाले से कहा था कि कंपनी अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेगी।
सरकार ने कहा- जन भागीदारी बढ़ाना था उद्देश्य
मंत्रायल के मुताबिक, यह ऐप “जन भागीदारी” को बढ़ावा देता है, क्योंकि नागरिक किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की रिपोर्ट कर सकते हैं और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस एप का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है और यदि उपयोगकर्ता चाहें तो वे इसे कभी भी अनइंस्टॉल कर सकते हैं।
बता दें कि स्मार्टफोन में एप के प्री-इंस्टॉलेशन को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य बनाने के आदेश के बाद विपक्ष ने संसद में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दूरसंचार विभाग के निर्देश पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए इसे तानाशाही करार दिया था। विपक्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार फ्रॉड को रोकने के नाम पर नागरिकों की जासूसी करना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी आरोप लगाते हुए कहा था कि मोदी सरकार का फोन में संचार सारथी एप इंस्टॉल करने का आदेश लोगों की निजता और आजादी पर खुला हमला है।
सिंधिया ने विपक्ष के सभी आरोपों को नकारा था
हालांकि, विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि ‘संचार साथी’ ऐप के जरिए जासूसी बिल्कुल भी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस एप से लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की सरकार की कोई मंशा नहीं है।
बता दें नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले सरकार ने कहा था कि एप फोन में अनिवार्य होगा और इसे डिलीट नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, विवाद बढ़ने पर दूरसंचार मंत्री ने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया को बताया था कि जरूरत न होने पर एप को फोन से डिलीट किया जा सकता है।
अब तक 1.4 करोड़ डाउनलोड
सरकार द्वारा एक्स पर जारी बयान के अनुसार, अब तक 1.4 करोड़ लोग यह एप डाउनलोड कर चुके हैं और रोजाना लगभग 2000 ऑनलाइन फ्रॉड मामलों की जानकारी भेज रहे हैं। बयान में कहा गया, “एप डाउनलोड करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। एप को अनिवार्य बनाने का उद्देश्य अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना था, ताकि कम तकनीक-जानकार लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। केवल पिछले एक दिन में ही 6 लाख लोगों ने एप डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो कि सामान्य से 10 गुना अधिक है। यह दर्शाता है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए इस ऐप पर भरोसा कर रहे हैं।”