रियाद: सऊदी अरब के मक्का-मदीना हाईवे पर रविवार (16 नवंबर) रात हुए बस हादसे में जान गंवाने वाले 45 भारतीय नागरिकों के शव वापस नहीं लाए जाएंगे। ये सभी उमरा (इस्लामी तीर्थयात्रा) के लिए सऊदी गए थे। तेलंगाना मंत्रिमंडल ने कल फैसला लिया है कि मारे गए लोगों को उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार सऊदी अरब में ही दफनाया जाएगा।
हर पीड़ित परिवार से दो लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने सऊदी अरब भेजे जाएंगे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परिजन को शव भारत वापस लाने या मदीना के जन्नतुल बकी में दफनाने का ऑप्शन दिया जाएगा। हालांकि सऊदी कानून के मुताबिक शवों की वापसी काफी मुश्किल है।
मुआवजा मिलना भी मुश्किल
वहीं, पीड़ित परिवारों को तुरंत मुआवजा मिलाना भी काफी मुश्किल है, क्योंकि सऊदी अरब में सड़क दुर्घटनाओं में सरकार की ओर से कोई सीधा मुआवजा नहीं दिया जाता। मुआवजा तभी मिल सकता है, जब पुलिस जांच में टैंकर ड्राइवर या कंपनी की गलती साबित हो और परिवार कानूनी दावा दायर करे। यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है।
सऊदी से तीर्थयात्रियों के शव वापस नहीं भेजे जाते
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हज या उमरा यात्रा शुरू करने से पहले तीर्थयात्रियों को एक डिक्लेरेशन फॉर्म पर साइन कराने पड़ते हैं। इसमें क्लियर लिखा होता है कि अगर सऊदी अरब की जमीन पर (मक्का, मदीना या कहीं भी) तीर्थ यात्री की मौत होती है, तो शव को वहीं दफनाया जाएगा।
वहीं, भारत सरकार के मुताबिक अगर किसी गैर-तीर्थयात्री भारतीय की सऊदी में मौत होती है, तब मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों की इच्छानुसार शव को भारत लाया जा सकता है या सऊदी अरब में दफनाया जा सकता है।
फ्यूल टैंकर ने बस को टक्कर मारी थी
मक्का से मदीना जा रही उमरा यात्रियों की बस रास्ते में किनारे खड़ी थी। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार फ्यूल टैंकर ने बस को टक्कर मार दी थी। मृतकों में ज्यादातर हैदराबाद के हैं। हादसा मदीना से लगभग 25 किलोमीटर दूर मुहरास के पास भारतीय समयानुसार रविवार देर रात लगभग 1:30 बजे हुआ। उस समय कई यात्री सो रहे थे। उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला।
मृतकों में 18 महिलाएं, 17 पुरुष और 10 बच्चे शामिल हैं। हादसे में सिर्फ 1 शख्स जिंदा बचा है। उसकी पहचान मोहम्मद अब्दुल शोएब (24 साल) के रूप में हुई है। शोएब (24) ड्राइवर के पास बैठा था। शोएब भी भारतीय हैं। हादसे के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। एक सरकारी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। मारे गए लोगों में से 18 एक ही परिवार के थे। इनमें 9 बच्चे और 9 बड़े शामिल थे। यह परिवार हैदराबाद का रहने वाला था और 22 नवंबर को भारत लौटने वाला था।