उत्तर प्रदेश, राजनीति

BJP ने जारी की यूपी के 14 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की लिस्‍ट, इन्‍हें मिली जिम्मेदारी

UP BJP: संगठन में बदलाव की सुगबुगाहट, 2027 के चुनाव की रणनीति हो रही तैयार!

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार (26 नवंबर) देर रात प्रदेश के 14 जिलों में नए जिलाध्यक्षों के नामों का ऐलान कर दिया। प्रदेश चुनाव अधिकारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने लिस्‍ट जारी की। इसमें उन जिलों के अध्यक्ष शामिल हैं, जिनके चुनाव संगठन चुनाव प्रक्रिया के दौरान जिले स्तर पर संपन्न कराए गए थे। लंबे समय से परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे इन पदों पर आखिरकार चयनित नामों को मंजूरी दे दी गई।

अलीगढ़ जिले में एक बार फिर जट्टारी के जिला पंचायत सदस्य कृष्णपाल सिंह लाला को जिलाध्यक्ष और इंजीनियर राजीव शर्मा को महानगर अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। घोषणा होते ही दोनों समर्थक समूहों में उत्साह का माहौल बन गया और देर रात तक बधाइयों का सिलसिला चलता रहा।

हाथरस में प्रेम सिंह को बनाया गया जिलाध्‍यक्ष

गौरतलब है कि दोनों नेताओं को पहली बार 16 सितंबर, 2023 को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी। संगठन चुनाव की प्रक्रिया वर्ष की शुरुआत में शुरू हुई थी और अलीगढ़, एटा और हाथरस में 50 से अधिक दावेदार मैदान में थे। मार्च में चुनाव टल जाने के बाद इन जिलों में नियुक्तियां लंबित थीं। अब 14 जिलाध्यक्षों की नई सूची में हाथरस में बदलाव करते हुए प्रेम सिंह को जिला अध्यक्ष बनाया गया है।

BJP ने जारी की यूपी के 14 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की लिस्‍ट, इन्‍हें मिली जिम्मेदारी

मेरठ जिले में पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग के प्रभावी नेता हरवीर पाल को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। भाजपा के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी गजेंद्र शर्मा ने बताया कि पश्चिम क्षेत्र में मेरठ से हरवीर पाल और हापुड़ से कविता माधरे को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। हरवीर पाल की पहचान अति पिछड़ा वर्ग के मजबूत नेताओं में होती है। वे उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

भावनपुर निवासी हरवीर पाल पहले भी तीन बार जिला इकाई के महामंत्री रह चुके हैं और लंबे समय से जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे थे। भाजपा द्वारा उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपे जाने को पार्टी का अति पिछड़ा वर्ग पर बड़ा दांव माना जा रहा है। इस निर्णय से उन वरिष्ठ नेताओं को झटका लगा है, जो अपने समर्थकों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय लॉबिंग कर रहे थे। इसी आंतरिक खींचतान के कारण मेरठ महानगर और जिला अध्यक्ष की घोषणा अब तक लंबित थी।

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