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Amit Shah: सनातन को मिटाना आसान नहीं, ये सूरज और चांद की तरह अमर

Amit Shah: सनातन को मिटाना आसान नहीं, ये सूरज और चांद की तरह अमर

Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति, लोगों की आस्था को खत्म करना आसान नहीं है। अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर के बीती सदियों में बार-बार तोड़े जाने और 16 बार पुनर्निर्माण का हवाला दिया। शाह ने कहा कि जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर पर हमले किए, वो मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी उसी जगह पर पूरे गर्व के साथ खड़ा है। अमित शाह गुजरात दौरे पर हैं। मंगलवार को अमित शाह ने गांधीनगर में 267 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

शाह ने कहा, ’16 बार तबाह किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर 1000 साल बाद भी पूरे गर्व और सम्मान के साथ खड़ा है और इसके शीर्ष पर धर्मध्वजा लहरा रही है।’ गृह मंत्री ने कहा, ‘ये पूरी दुनिया के लिए संदेश है कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और लोगों की आस्था को मिटाना आसान नहीं है। यह चांद और सूरज की तरह शाश्वत और अमर है। सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, विश्वास और गर्व का प्रतीक है।’

पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ किया

बीती 11 जनवरी को पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ किया था। यह पर्व सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनी के हमले और मंदिर के पुनर्निर्माण के 1000 हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। महमूद गजनी ने साल 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर के भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे सालभर देश में मनाया जाएगा। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और लोगों को जागरूक किया जाएगा।

मंदिर पर हमला हमारी आस्था पर हमला था

शाह ने कहा, ‘एक हजार साल पहले महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और इसे तोड़ा। उसके बाद अन्य हमलावरों जैसे अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब ने भी हमले किए, लेकिन हर हमले के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। हमलावर तबाही में विश्वास रखते थे और मंदिर बनाने वालों का विश्वास रचना में। आज 1000 साल बाद हमलावर मिट गए हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर अभी भी पूरे गर्व के साथ खड़ा है।’ गृह मंत्री ने कहा, ‘सोमनाथ मंदिर पर हमला सिर्फ एक मंदिर पर हमला नहीं था बल्कि ये हमारी आस्था, विश्वास और आत्म सम्मान पर हमला था। हमले का जवाब दूसरा हमला नहीं हो सकता। इसका उत्तर आत्म-सम्मान में छिपा है।’

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