UP News: उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे कैंसर मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। लक्ष्य है कि जांच का दायरा बढ़ाकर मरीजों को शुरुआती चरण में ही उपचार उपलब्ध कराया जाए ताकि मृत्यु दर कम हो और बढ़ोतरी की रफ्तार में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट लाई जा सके। वर्तमान में करीब 10 लाख से अधिक मरीज पंजीकृत हैं और हर साल लगभग ढाई लाख नए मामले सामने आ रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने 100 अस्पतालों में कैंसर जांच और उपचार सुविधाओं का विस्तार करने का फैसला किया है। मंडलीय अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं को अत्याधुनिक बनाया जाएगा इसके बाद जिला अस्पतालों में भी आधारभूत ढांचा मजबूत किया जाएगा। इलाकेवार आंकड़ों के विश्लेषण के लिए कैंसर रजिस्ट्री शुरू की गई है।
अस्पतालों से डाटा जुटाया जा रहा
सरकारी और निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों से डाटा जुटाया जा रहा है। वायबिलिटी गैप एनालिसिस और पीपीपी मॉडल के तहत नए कैंसर अस्पताल खोलने की भी योजना है। इस दिशा में कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो. एमएलबी भट्ट के नेतृत्व में समिति गठित की गई है। सभी चयनित अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए चार-चार बेड के डे-केयर सेंटर भी बनाए गए हैं। कैंसर वाले मरीजों की जांच और उपचार के लिए इलाकेवार सुविधाएं बढ़ाने का फैसला लिया गया है। सरकार स्क्रीनिंग को इस रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा, लक्ष्य है कि कम से कम 50 प्रतिशत आबादी की नियमित स्क्रीनिंग हो सके ताकि संदिग्ध मामलों को समय रहते उच्च केंद्रों पर रेफर किया जा सके।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि सरकार हर मरीज को तत्काल उपचार देना चाहती है। कैंसर के बढ़ते मरीज चिंताजनक हैं। मेडिकल कॉलेज से लेकर मंडलीय और जिला अस्पताल में कैंसर जांच और उपचार की सुविधाएं चरणवद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है। कोशिश है कि लक्षण के आधार पर जल्द मरीजों का उपचार शुरू हो जाए। प्रदेशवासियों से अपील है कि किसी भी तरह के लक्षण होने पर नजदीकी अस्पताल में स्क्रीनिंग कराएं और उपचार शुरू कराएं। घबराने की जरूरत नहीं है।